कुमाऊं विश्वविद्यालय के बीडी पांडे परिसर को मिला नया विज्ञान भवन, 13 साल का लंबा इंतजार खत्म

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बागेश्वर: उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जिले के अग्रणी संस्थान पंडित बद्री दत्त पांडे (बीडी पांडे) परिसर के छात्रों के लिए एक बड़ी बाधा दूर हो गई है। पिछले लगभग एक दशक से भी अधिक समय से तकनीकी और प्रशासनिक उलझनों के कारण लंबित विज्ञान संकाय भवन के हस्तांतरण का मामला आखिरकार सुलझ गया है। जिला प्रशासन की व्यक्तिगत सक्रियता और ठोस पैरवी के बाद कार्यदायी संस्था सीएनडीएस (CNDS) ने नवनिर्मित भवन को आधिकारिक रूप से परिसर प्रशासन को सौंप दिया है। इस कदम से न केवल करोड़ों की सरकारी संपत्ति का सदुपयोग सुनिश्चित होगा, बल्कि परिसर में कक्षाओं की भारी कमी भी दूर होगी।

2013 में बनकर तैयार हुआ था भवन, फाइलों में कैद रही चाबियां

इस मामले की पृष्ठभूमि सरकारी कार्यप्रणाली की सुस्ती का बड़ा उदाहरण रही है। बागेश्वर के इस महत्वपूर्ण परिसर में विज्ञान संकाय भवन का निर्माण कार्य वर्ष 2013 में ही पूरा कर लिया गया था। उस समय इस परियोजना पर लगभग 183.35 लाख रुपये की लागत आई थी। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बावजूद मामूली तकनीकी औपचारिकताओं और विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी के कारण इस भवन का हस्तांतरण नहीं हो सका था।

परिणामस्वरूप, 1.83 करोड़ की लागत से बनी यह शानदार इमारत पिछले 13 वर्षों से अनुपयोगी पड़ी रही। एक ओर छात्र जर्जर और संकरी कक्षाओं में बैठने को मजबूर थे, तो दूसरी ओर नया भवन धूल फांक रहा था। छात्रों ने कई बार इस भवन को शैक्षणिक उपयोग में लाने के लिए आवाज उठाई, लेकिन मामला फाइलों के बीच अटका रहा।

जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से बनी बात

लंबे समय से अधर में लटके इस प्रकरण को वर्तमान जिला प्रशासन ने प्राथमिकता पर लिया। छात्रों की शैक्षणिक समस्याओं और कॉलेज प्रशासन की मांग को देखते हुए प्रशासन ने कार्यदायी संस्था सीएनडीएस और संबंधित विभागों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित किया। प्रशासन के सख्त और स्पष्ट रुख का ही परिणाम रहा कि वर्षों से चली आ रही तकनीकी अड़चनें महज कुछ दौर की वार्ताओं में दूर कर ली गईं।

इस पूरी प्रक्रिया में परिसर निदेशक की भूमिका भी सकारात्मक रही। उन्होंने हस्तांतरण के लिए आवश्यक सभी कागजी औपचारिकताओं को त्वरित गति से पूर्ण कराया, जिससे कार्यदायी संस्था को भवन सौंपने में कोई बाधा नहीं रही। जिला प्रशासन के इस समन्वित प्रयास की अब शिक्षा जगत और स्थानीय अभिभावकों द्वारा सराहना की जा रही है।

छात्रों को मिलने वाले लाभ और शैक्षणिक बदलाव

भवन का आधिकारिक कब्जा मिल जाने के बाद अब बागेश्वर परिसर के छात्रों को कई महत्वपूर्ण सुविधाएं मिलेंगी:

  • अतिरिक्त कक्षाओं का लाभ: अब विज्ञान संकाय के छात्रों को आधुनिक और विशाल कक्षाओं में बैठकर पढ़ने की सुविधा मिलेगी, जिससे परिसर में स्थान की वर्षों पुरानी समस्या समाप्त होगी।

  • बेहतर प्रयोगात्मक वातावरण: नए भवन में विज्ञान की प्रयोगशालाओं को व्यवस्थित रूप से स्थापित किया जा सकेगा, जो छात्रों के प्रैक्टिकल वर्क के लिए अनिवार्य है।

  • शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार: एक ही छत के नीचे पर्याप्त संसाधन मिलने से पठन-पाठन का माहौल बेहतर होगा और शिक्षकों को भी शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन में आसानी होगी।

प्रशासन का सख्त रुख: अन्य शिकायतों की भी होगी जांच

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह केवल शुरुआत है। परिसर से जुड़ी अन्य समस्याओं, जैसे बुनियादी सुविधाओं की कमी या रखरखाव की शिकायतों को भी गंभीरता से लिया जा रहा है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि भविष्य में भी छात्रों की शैक्षणिक राह में आने वाली किसी भी अड़चन की जांच कर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। उद्देश्य यह है कि सीमांत जिले बागेश्वर के छात्रों को शिक्षा के लिए किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

निष्कर्ष: जनहित में लिया गया साहसिक निर्णय

करोड़ों की लागत से निर्मित भवन का इतने वर्षों तक बंद रहना सरकारी संसाधनों की भारी बर्बादी थी। बागेश्वर जिला प्रशासन की इस पहल ने न केवल इस बर्बादी को रोका है, बल्कि उच्च शिक्षा के प्रति अपनी संवेदनशीलता भी दिखाई है। इस भवन के चालू होने से बागेश्वर के सैकड़ों युवाओं का भविष्य संवरेगा और पंडित बीडी पांडे परिसर के विकास को एक नई गति मिलेगी।

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