
हल्द्वानी। तहसील क्षेत्र के अंतर्गत जमीन की खरीद-फरोख्त के बाद दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) की प्रक्रिया को लेकर जनता के बीच बनी असमंजस की स्थिति पर प्रशासन ने महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। अक्सर देखा जा रहा है कि तहसील स्तर पर म्यूटेशन का आदेश होने के बावजूद डिजिटल पोर्टल पर खतौनी अपडेट नहीं हो रही है, जिससे लोग परेशान हैं। इस मामले में तहसीलदार कुलदीप पाण्डे ने बताया कि यह समस्या किसी प्रक्रियात्मक कमी के कारण नहीं, बल्कि तकनीकी अपग्रेडेशन की वजह से उत्पन्न हुई है।
नए पोर्टल पर डेटा ट्रांसफर बना बड़ी वजह
राजस्व विभाग के कामकाज को आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने हाल ही में एक नया भू-लेख पोर्टल लॉन्च किया है। पुराने सिस्टम से नए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डेटा स्थानांतरित (Data Migration) करने की प्रक्रिया फिलहाल जारी है। तहसीलदार के अनुसार, हल्द्वानी तहसील में दाखिल-खारिज का कार्य पूरी पारदर्शिता और गति के साथ किया जा रहा है। नियमानुसार, जब भी कोई म्यूटेशन आदेश पारित होता है, तो उसकी पहली एंट्री विभाग की ‘R6 पंजिका’ (रजिस्टर) में दर्ज की जाती है। इसी रजिस्टर के आधार पर डेटा को ऑनलाइन सर्वर पर चढ़ाया जाता है। वर्तमान में नया पोर्टल होने के कारण सर्वर पर डेटा ‘फैच’ (Fetch) होने में तकनीकी समय लग रहा है।
प्रशासनिक सक्रियता और विशेषज्ञों की टीम तैनात
जनता की इस समस्या को देखते हुए तहसील प्रशासन ने पहले ही शासन को पत्र लिखकर तकनीकी बाधाओं की जानकारी दे दी है। कुलदीप पाण्डे ने बताया कि विभाग के तकनीकी विशेषज्ञों से इस संबंध में लगातार वार्ता चल रही है। विशेषज्ञों ने आश्वासन दिया है कि डेटा सिंकिंग का काम अंतिम चरण में है और जल्द ही सभी लंबित प्रविष्टियां ऑनलाइन पोर्टल पर प्रदर्शित होने लगेंगी। शासन स्तर पर इस तकनीकी खामी को प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया जा रहा है ताकि आम आदमी को घर बैठे अपनी खतौनी देखने में दिक्कत न हो।
आम आदमी के लिए ‘प्लान-बी’: अब नहीं रुकेंगे जरूरी काम
जब तक पोर्टल पूरी तरह सुचारू नहीं होता, तब तक जनता के कार्यों में बाधा न आए, इसके लिए तहसीलदार ने एक सुगम व्यवस्था की जानकारी दी है। यदि किसी पक्षकार को बैंक लोन, रजिस्ट्री या अन्य किसी कानूनी कार्य के लिए दाखिल-खारिज के प्रमाण की तत्काल आवश्यकता है, तो वह सीधे हल्द्वानी तहसील कार्यालय के ‘रजिस्ट्रार कानूनगो’ अनुभाग में संपर्क कर सकता है। वहां R6 पंजिका में दर्ज आदेश की सत्यापित प्रति (Certified Copy) प्राप्त की जा सकती है। यह सत्यापित प्रति पूरी तरह वैध है और इसे सभी सरकारी व गैर-सरकारी कार्यों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
भ्रामक खबरों से सावधान रहने की अपील
क्षेत्रीय जनता से अपील करते हुए तहसीलदार ने कहा कि तहसील के भीतर दाखिल-खारिज से संबंधित कार्यों में कोई समस्या नहीं है और सभी पत्रावलियों का निस्तारण समय सीमा के भीतर किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पोर्टल की समस्या केवल ‘ऑनलाइन प्रदर्शन’ तक सीमित है, ‘प्रक्रिया’ तक नहीं। यदि किसी भी व्यक्ति को राजस्व संबंधी कार्यों में कोई कठिनाई आती है या कोई उनसे गलत जानकारी साझा करता है, तो वे सीधे तहसीलदार से मिलकर अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं।
निष्कर्ष: जनहित में पारदर्शिता की प्राथमिकता
इस पहल से उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जो अपनी संपत्ति के दस्तावेजों को ऑनलाइन न देखकर चिंतित थे। प्रशासन की यह सक्रियता दर्शाती है कि डिजिटल बदलाव के दौर में पैदा होने वाली व्यावहारिक समस्याओं के प्रति वे सजग हैं। जैसे ही डेटा माइग्रेशन की प्रक्रिया पूरी होगी, हल्द्वानी की खतौनी ऑनलाइन उपलब्ध होगी, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।