
देहरादून-उत्तराखंड में परिवार रजिस्टरों में सामने आ रही अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह स्पष्ट निर्णय लिया गया कि प्रदेशभर में परिवार रजिस्टरों की व्यापक और निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यह जांच सीडीओ (मुख्य विकास अधिकारी) और एडीएम स्तर पर की जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, फर्जीवाड़े या नियमों के उल्लंघन को चिन्हित कर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
सरकार का मानना है कि परिवार रजिस्टर न केवल सरकारी योजनाओं और सेवाओं का आधार है, बल्कि यह सामाजिक और जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में इसमें किसी भी तरह की अनियमितता सीधे तौर पर शासन-प्रशासन की पारदर्शिता और आम नागरिकों के अधिकारों को प्रभावित करती है।
जांच का दायरा और प्रक्रिया
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जांच का दायरा वर्ष 2003 से अब तक के सभी परिवार रजिस्टरों तक विस्तारित किया जाएगा। पूर्व वर्षों में हुए नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की जाएगी। यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि किसी व्यक्ति या अधिकारी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराया है या नियमों की अनदेखी की गई है, तो संबंधित के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी जिलों में परिवार और कुटुंब रजिस्टरों की प्रतियां सुरक्षित रखी जाएं, जिससे रिकॉर्ड से किसी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना न रहे। साथ ही यह भी तय किया गया कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो और किसी भी स्तर पर दबाव या हस्तक्षेप स्वीकार न किया जाए।
पंचायत स्तर पर भूमिका और अधिकार
परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने का अधिकार सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) के पास होता है, जबकि अपील का अधिकार उपजिलाधिकारी (एसडीएम) स्तर पर निहित है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में नियमों का पालन अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बैठक में यह भी सामने आया कि बीते वर्षों में राज्य की सीमाओं से लगे मैदानी जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में अनधिकृत बसावट के आधार पर परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज किए गए, जिससे जनसांख्यिकीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है। इसी को ध्यान में रखते हुए नियमावली में आवश्यक संशोधन की जरूरत पर भी विचार किया गया।
नए परिवार जोड़ने के आंकड़े
पंचायती राज विभाग के अनुसार वर्ष 2025 में परिवार रजिस्टर से जुड़ी सेवाओं के लिए प्रदेशभर से बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नए परिवार जोड़ने के लिए कुल 2.66 लाख से अधिक आवेदन आए। इनमें से अधिकांश आवेदनों को स्वीकृति दी गई, जबकि कुछ आवेदन नियमों के उल्लंघन और अपूर्ण दस्तावेजों के कारण निरस्त किए गए।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में परिवार रजिस्टर से संबंधित सेवाओं को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन माध्यमों का विस्तार किया जाएगा, ताकि आम नागरिकों को सुविधा मिले और अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।
सरकारी अभिलेखों से छेड़छाड़ पर सख्त संदेश
मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि सरकारी अभिलेखों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है—परिवार रजिस्टर की प्रक्रिया को नियमबद्ध, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना।
कुल मिलाकर, राज्य सरकार का यह कदम प्रशासनिक सुधार और सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल सरकारी योजनाओं का लाभ सही पात्रों तक पहुंचेगा, बल्कि व्यवस्था में जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।