25 महीने में दोगुनी रकम का लालच देकर फंसाया, रिटायर्ड शिक्षक और फौजी भी बने शिकार।

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हल्द्वानी। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में निवेश के नाम पर एक बड़े सिंडिकेट ने करीब 8000 लोगों को अपना शिकार बनाया है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि विमल रावत नाम के एक व्यक्ति ने पहले लोगों को शेयर बाजार में भारी मुनाफे का झांसा दिया और जब एक बड़ा नेटवर्क तैयार हो गया, तो उसने अपनी खुद की फाइनेंस कंपनी खोलकर करोड़ों रुपये का गबन कर लिया। इस मामले में कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत की छापेमारी के बाद पुलिस ने फाइनेंस कंपनी के सीईओ विमल रावत, उनकी पत्नी रूबी रावत और एक अन्य निदेशक अनूप कंडारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

ऐसे बुना गया ठगी का जाल: विश्वास से धोखे तक का सफर

जांच में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि विमल रावत कई वर्षों से शेयर बाजार में लोगों का पैसा निवेश करवाता था। शुरुआत में उसने लोगों का भरोसा जीतने के लिए निवेश की गई राशि पर अच्छा रिटर्न दिखाया। इस दौरान वह मुनाफे का 10 प्रतिशत हिस्सा खुद कमीशन के तौर पर रखता था। जब निवेशकों की संख्या बढ़ने लगी और लोगों को उस पर अटूट विश्वास हो गया, तो उसने शेयर बाजार का काम छोड़कर अपनी खुद की फाइनेंस कंपनी ‘जीएसएफएक्स ग्लोबल लिमिटेड’ खड़ी कर दी।

इस कंपनी में उसने समाज के हर वर्ग को निशाना बनाया। रिटायर्ड शिक्षक, पूर्व सैनिक, वन दरोगा, पुलिसकर्मी और निजी क्षेत्र में काम करने वाले लोग इस जाल में फंसते चले गए। आरोपियों ने निवेशकों को लुभाने के लिए 25 से 30 महीनों में रकम दोगुनी करने और हर महीने 8 प्रतिशत ब्याज देने का लिखित अनुबंध (एग्रीमेंट) तक किया।

39 करोड़ की ठगी और संपत्तियों का खेल

पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने अब तक करीब 39 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। हैरानी की बात यह है कि निवेशकों का पैसा कंपनी के अधिकृत खातों में जमा करने के बजाय विमल रावत ने इसे अपने निजी खातों में ट्रांसफर किया। जांच में पता चला है कि इस पैसे से आरोपी ने रामनगर में भूमि और अन्य संपत्तियां खरीदीं। पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि वह हल्द्वानी के साथ-साथ लखनऊ में भी बड़े भूखंड खरीदने की योजना बना रहा था।

नेटवर्क का विस्तार: उत्तराखंड से यूपी और दिल्ली तक तार

यह केवल हल्द्वानी तक सीमित मामला नहीं है। पुलिस को संदेह है कि इस गिरोह के तार उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक जुड़े हुए हैं। कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों को वेतन के बजाय केवल कमीशन पर रखा गया था। उनका काम नए लोगों को जोड़ना और चैन बनाना था। जितना बड़ा निवेश, उतना ज्यादा कमीशन—इसी फार्मूले ने इस गिरोह को तेजी से फैलने में मदद की।

सावधानी ही बचाव है: विशेषज्ञों की राय

इस घटनाक्रम के बाद एसपी सिटी मनोज कत्याल ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी लुभावनी योजना में निवेश करने से पहले कंपनी की वैधानिक स्थिति की जांच जरूर करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी अधिकृत वित्तीय संस्थान रातों-रात रकम दोगुनी करने का दावा नहीं कर सकता।

धोखाधड़ी से बचने के मुख्य बिंदु:

  • किसी भी फाइनेंस कंपनी में निवेश से पहले उसके रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस की जांच करें।

  • बाजार दर से अत्यधिक ऊंचे रिटर्न के वादों से हमेशा सावधान रहें।

  • कंपनी के निदेशकों का बैकग्राउंड और पुराने रिकॉर्ड की पड़ताल करें।

  • बिना पुख्ता कानूनी दस्तावेजों के किसी को भी नकद या निजी खाते में पैसा न दें।

निष्कर्ष: जनहित का नजरिया

यह मामला समाज के लिए एक बड़ी चेतावनी है। अक्सर लोग जान-पहचान और शुरुआती छोटे मुनाफे के चक्कर में अपनी जीवनभर की जमापूंजी दांव पर लगा देते हैं। हल्द्वानी का यह प्रकरण बताता है कि ठग अब डिजिटल और कानूनी दस्तावेजों (एग्रीमेंट) का सहारा लेकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। प्रशासन की मुस्तैदी से यह घोटाला उजागर तो हो गया है, लेकिन निवेशकों का पैसा वापस मिलना अब एक लंबी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।

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