
गुरुवार, 5 मार्च 2026 को भारतीय शेयर बाजार ने एक शानदार वापसी की है। पिछले कुछ दिनों से लगातार गिरते बाजार के बीच आज निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान वापस लौट आई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 900 अंक या 1.14 प्रतिशत की मजबूती के साथ 80,015.90 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 सूचकांक भी पीछे नहीं रहा और 1.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,765.90 पर जाकर थमा। इस एक दिवसीय उछाल ने निवेशकों की कुल संपत्ति में 6 लाख करोड़ रुपये का इजाफा किया है।
बाजार का घटनाक्रम और पृष्ठभूमि
पिछले चार कारोबारी सत्रों से बाजार भारी दबाव में था। इन चार दिनों में सेंसेक्स में लगभग 3,160 अंकों की गिरावट दर्ज की गई थी, जिससे निवेशकों में घबराहट का माहौल था। बाजार में कुल 3.8 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी थी। लेकिन गुरुवार को तस्वीर पूरी तरह बदल गई। बाजार में सुबह से ही खरीदारी का माहौल दिखा, जो सत्र के अंत तक जारी रहा। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 1.44 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 1.38 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ, जो यह दर्शाता है कि यह तेजी केवल चुनिंदा बड़े शेयरों तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरे बाजार में चौतरफा खरीदारी हुई।
तेजी के मुख्य कारण: शॉर्ट कवरिंग और तकनीकी सुधार
विशेषज्ञों के अनुसार, आज की तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण ‘शॉर्ट कवरिंग’ है। जब बाजार बहुत ज्यादा गिर जाता है, तो जो ट्रेडर्स बाजार के गिरने पर दांव लगा रहे थे, वे अपने मुनाफे को सुरक्षित करने या नुकसान से बचने के लिए शेयर खरीदना शुरू करते हैं, जिसे शॉर्ट कवरिंग कहते हैं।
इसके अलावा, बाजार पिछले कुछ दिनों की गिरावट के बाद ‘ओवरसोल्ड’ (अत्यधिक बिकवाली) जोन में पहुंच गया था। तकनीकी तौर पर, ऐसे स्तरों पर बाजार में उछाल की संभावना हमेशा बनी रहती है।
रुपया और भू-राजनीतिक कारक
बाजार की धारणा को सुधारने में भारतीय रुपये की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। बुधवार को रुपया 92.30 प्रति डॉलर के सर्वकालिक निचले स्तर तक गिर गया था। गुरुवार को इसमें सुधार देखा गया और यह 54 पैसे की मजबूती के साथ 91.60 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मुद्रा को सहारा देने के लिए बाजार में हस्तक्षेप किया, जिसका सकारात्मक असर सेंटीमेंट पर पड़ा।
साथ ही, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच कुछ खबरों ने बाजार में आशा की किरण जगाई। ऐसी खबरें सामने आईं कि ईरान ने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने को लेकर अमेरिका को कुछ सशर्त प्रस्ताव दिए हैं। हालांकि, इन खबरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बाजार ने इसे सकारात्मक संकेत के रूप में लिया।
विशेषज्ञों की राय
बाजार की इस चाल पर जानकारों का क्या मानना है, इसे समझना भी जरूरी है।
विनोद नायर (हेड ऑफ रिसर्च, जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड) ने कहा, “बाजार में तेजी का माहौल अंत तक बना रहा। ईरान और अमेरिका/इजरायल के बीच तनाव कम होने की उम्मीदों ने निवेशकों का मनोबल बढ़ाया है। साथ ही, अमेरिका के साथ भारत के व्यापार समझौते के करीब होने की खबर से भी बाजार को सहारा मिला। धातु, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं, रियलिटी और ऑटो सेक्टर में अच्छी खरीदारी देखी गई, जबकि रुपये की मजबूती के कारण आईटी शेयरों पर दबाव बना रहा।”
हितेश टेलर (टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट, चॉइस ब्रोकिंग) का मानना है कि यह एक राहत रैली (रिलीफ रैली) थी। उन्होंने कहा, “बाजार ओवरसोल्ड जोन में था, इसलिए तकनीकी उछाल आना स्वाभाविक था। इंडिया VIX में आई कमी बताती है कि बाजार ने भू-राजनीतिक जोखिम का बड़ा हिस्सा पहले ही डिस्काउंट कर लिया था।”
निवेशकों के लिए सबक और आगे की राह
बाजार में आई इस तेजी से बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 447.2 लाख करोड़ से बढ़कर 453 लाख करोड़ रुपये हो गया है। आम निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि बाजार में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है। जब बाजार में बहुत अधिक गिरावट होती है, तो अक्सर उसके बाद सुधार भी आता है।
आगे क्या हो सकता है? बाजार अभी भी वैश्विक तनावों, विशेषकर अमेरिका-ईरान युद्ध के साये में है। युद्ध में मिसाइल हमलों की खबरें और तेल टैंकरों पर हमले जैसी घटनाएं बाजार में कभी भी अस्थिरता पैदा कर सकती हैं। हालांकि, तकनीकी आधार पर बाजार ने आज अपनी मजबूती दिखाई है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे घबराहट में कोई फैसला न लें और बाजार की हर खबर को बारीकी से परखें।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, गुरुवार का दिन भारतीय बाजार के लिए राहत भरा रहा। एक दिन में निवेशकों की संपत्ति में 6 लाख करोड़ का इजाफा यह बताता है कि बाजार अभी भी मजबूती की तलाश में है। लेकिन युद्ध जैसी बाहरी स्थितियों को देखते हुए, निवेशकों को लंबी अवधि का नजरिया अपनाना चाहिए और बाजार की अस्थिरता के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए।