चंपावत में कला कार्यशाला: सौ से अधिक प्रतिभागियों ने सीखे मधुबनी और आधुनिक चित्रकला के गुण

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चंपावत: चंपावत सरस कॉर्बेट महोत्सव 2026 के अंतर्गत एक दो दिवसीय कला कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस कार्यशाला का उद्घाटन वरिष्ठ चित्रकार अवधेश मिश्र ने किया। अवधेश मिश्र ‘कला दीर्घा’ नामक अंतर्राष्ट्रीय दृश्य कला पत्रिका के संपादक भी हैं। इस दो दिवसीय कार्यशाला में सौ से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जहाँ उन्हें मधुबनी कला और आधुनिक चित्रकला की विभिन्न शैलियों का प्रशिक्षण दिया गया।

अवधेश मिश्र ने प्रतिभागियों को रंगों के संतुलन, रेखाओं की सटीकता, विषय के चुनाव, चित्र की संरचना और अभिव्यक्ति की शैलियों के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने अपने तीन दशकों के कलात्मक अनुभव साझा करते हुए कला के क्षेत्र में अनुशासन, समय के प्रभावी प्रबंधन और नैतिक प्रतिबद्धता को सफलता के लिए आवश्यक बताया।

कार्यशाला के व्यावहारिक सत्र में प्रतिभागियों ने मधुबनी और आधुनिक शैली की पेंटिंग बनाने का अभ्यास किया। सभी प्रतिभागियों ने कलाकृतियाँ तैयार कीं, जिन्हें उपस्थित लोगों ने सराहा।

इस कार्यशाला में शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के कलाचार्य ने भी प्रतिभागियों को लोककलाओं और समकालीन कला की विशेषताओं से परिचित कराया। उन्होंने उत्तराखण्ड की पारंपरिक ऐपण कला तथा देश की विभिन्न लोककलाओं की विशिष्टताओं पर प्रकाश डाला। विद्यार्थियों को सृजनात्मकता, रंगों के संयोजन और रेखांकन की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय के विद्यार्थियों के साथ एक विशेष संवाद सत्र आयोजित हुआ। इस संवाद सत्र में विद्यार्थियों को स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस के जीवन से प्रेरणा ग्रहण करने, आत्मविश्वास विकसित करने, अनुशासन का पालन करने और राष्ट्रीय विकास में अपना योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

अवधेश मिश्र को भारत गौरव सम्मान और शिक्षा रत्न सम्मान सहित कई राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

इस कार्यक्रम में मुख्य शिक्षा अधिकारी मेहरबान सिंह बिष्ट, सहायक परियोजना निदेशक विम्मी जोशी, प्रबंधक उद्योग पंकज तिवारी, विकास नेगी, प्रिया रावत, विश्व दीपक, अरविंद जोशी, अर्पित शर्मा, रियांशु गुप्ता और पलक मिश्रा उपस्थित थे। इनके साथ अन्य अधिकारी, शिक्षक और छात्र-छात्राएँ भी मौजूद रहे।

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