
चम्पावत – नशा मुक्त चम्पावत की दिशा में जिला प्रशासन की विशेष पहल
जनपद चम्पावत में “नशा मुक्त भारत” अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में जिला प्रशासन लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में जिलाधिकारी मनीष कुमार की पहल पर “मुख्यमंत्री संस्कृति संवर्धन पहल – कला, परंपरा और पहचान” तथा “नशा मुक्त भारत, नशा मुक्त देवभूमि” कार्यक्रम के अंतर्गत ऋषेश्वर महादेव मंदिर में संस्कृति संवर्धन किट भेंट की गई।
इस अवसर पर जिलाधिकारी मनीष कुमार ने मंदिर परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना कर जनपद की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने मंदिर परिसर का निरीक्षण करते हुए व्यवस्थाओं की जानकारी ली और स्थानीय जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों के साथ विकास एवं संरक्षण से जुड़े विषयों पर चर्चा की।
संस्कृति के माध्यम से नशा मुक्ति का संदेश
जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री संस्कृति संवर्धन पहल का उद्देश्य केवल परंपराओं का संरक्षण नहीं, बल्कि समाज को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़कर सकारात्मक दिशा प्रदान करना है। धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर युवाओं तक जागरूकता संदेश प्रभावी रूप से पहुँचाया जा सकता है।
इसी सोच के तहत मंदिर के पुजारी को संस्कृति संवर्धन किट प्रदान की गई, जिसमें धार्मिक एवं सांस्कृतिक पुस्तकों के साथ-साथ पारंपरिक वाद्य यंत्र और जनजागरूकता सामग्री शामिल है। इन सामग्रियों का उपयोग सांस्कृतिक कार्यक्रमों, भजन-कीर्तन और सामाजिक आयोजनों में किया जाएगा, ताकि युवाओं को भारतीय परंपरा और नैतिक मूल्यों से जोड़ा जा सके।
जिलाधिकारी ने कहा कि जब युवा अपनी संस्कृति और पहचान से जुड़ते हैं, तो वे स्वाभाविक रूप से नशे जैसी कुप्रवृत्तियों से दूर रहते हैं। संस्कृति से जुड़ाव व्यक्ति को आत्मबल, अनुशासन और सकारात्मक सोच प्रदान करता है।
लोहावती नदी संरक्षण पर जोर
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने मंदिर परिसर के समीप बहने वाली लोहावती नदी के संरक्षण को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों के आसपास स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण विशेष प्राथमिकता होनी चाहिए।
इसके साथ ही नगर क्षेत्र में संचालित एफएसटीपी (फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) से जुड़े कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि स्वच्छता व्यवस्था मजबूत हो और पर्यावरण प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण, नशा मुक्ति अभियान के समानांतर चलने वाले महत्वपूर्ण आयाम हैं, क्योंकि एक स्वस्थ समाज का निर्माण बहुआयामी प्रयासों से ही संभव है।
नशा मुक्त देवभूमि का संकल्प
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कहा कि “नशा मुक्त भारत, नशा मुक्त देवभूमि” अभियान के तहत जनपद में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। स्कूलों, कॉलेजों, पंचायतों, धार्मिक स्थलों और सामुदायिक संगठनों के माध्यम से युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार की आर्थिक स्थिति और सामाजिक संरचना पर गंभीर प्रभाव डालता है। इसलिए प्रशासन केवल कानून प्रवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि जागरूकता और जनसहभागिता को प्राथमिकता दे रहा है।
जनसहभागिता से बनेगा स्वस्थ समाज
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल सरकारी कार्यक्रमों का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि जनसहभागिता के माध्यम से स्थायी परिवर्तन लाना है। समाज के धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थान इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जब मंदिर, आश्रम और अन्य धार्मिक स्थल सामाजिक संदेशों का माध्यम बनते हैं, तो उसका व्यापक प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ, सशक्त और संस्कारवान समाज के निर्माण के लिए प्रशासन निरंतर प्रयासरत है। विभिन्न अभियानों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और जनजागरूकता गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को सकारात्मक दिशा देने का कार्य किया जा रहा है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहभागिता
कार्यक्रम के दौरान नगर पालिका अध्यक्ष गोविंद वर्मा, खंड विकास अधिकारी अशोक अधिकारी, निर्मल महरा, सतीश पांडे सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए उपयोगी कदम बताया।
संस्कृति और जागरूकता का संयुक्त प्रयास
चम्पावत में शुरू की गई यह पहल स्पष्ट करती है कि नशा मुक्ति केवल प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन है। जब संस्कृति, परंपरा और जनजागरूकता एक साथ जुड़ते हैं, तो समाज में सकारात्मक बदलाव की राह मजबूत होती है।
जिला प्रशासन का यह प्रयास न केवल नशा मुक्त चम्पावत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी एक सशक्त संदेश है।