खेतीखान का “खेचुआ” पहुँचा विदेशों तक — इंजीनियर रिंकू ओली ने परंपरा और नवाचार से लिखी सफलता की कहानी

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चंपावत-मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन और राज्य सरकार की उद्यमिता-प्रोत्साहक नीतियों के तहत उत्तराखण्ड के युवा आज अपनी मेहनत और नवाचार से आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार कर रहे हैं। ऐसी ही एक प्रेरक मिसाल बनी है चंपावत जनपद के खेतीखान क्षेत्र के युवा उद्यमी श्री रिंकू ओली की कहानी — जिन्होंने पारंपरिक मिठाई ‘खेचुआ’ को देश ही नहीं, विदेशों तक पहचान दिला दी।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब अपेक्षित नौकरी नहीं मिली, तो रिंकू ओली ने हार मानने के बजाय अपने पारिवारिक व्यवसाय को आधुनिक स्वरूप देने का निर्णय लिया। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) और उद्योग विभाग, चंपावत के सहयोग से उन्हें ₹12 लाख का ऋण प्राप्त हुआ, जिसके बल पर उन्होंने “रिंकू स्वीट हाउस एंड बेकर्स” की स्थापना की।

रिंकू के पिता ने वर्ष 1996 में मात्र 2 लीटर दूध से खेचुआ बनाना शुरू किया था, लेकिन आज रिंकू प्रतिदिन 200 लीटर दूध से मिठाई तैयार करते हैं, और उनकी मिठास अब सीमाओं को पार कर चुकी है। उनके द्वारा तैयार खेचुआ अब विदेशों तक पहुँच चुका है, जिससे “Made in Champawat” का नाम गर्व से गूंज रहा है।

वर्तमान में रिंकू ओली की इकाई में 5 लोग कार्यरत हैं, जबकि वे 50 से अधिक स्थानीय पशुपालकों से दूध खरीदते हैं। इस तरह वे न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रहे हैं।

रिंकू ओली का कहना है — “हमारी पारंपरिक मिठाइयों में अपार संभावनाएँ हैं। अगर युवा आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ें तो पहाड़ का हर उत्पाद वैश्विक स्तर पर पहचान बना सकता है।”

यह कहानी बताती है कि दृढ़ संकल्प, सरकारी सहयोग और पारंपरिक ज्ञान का संगम कैसे एक साधारण विचार को अंतरराष्ट्रीय सफलता में बदल सकता है।


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