
अल्मोड़ा-पं. गोविंद बल्लभ पंत राजकीय संग्रहालय के तत्वावधान में लोक कलाकारों का ऑडिशन आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य एकल लोक गायकों एवं विभिन्न सांस्कृतिक दलों को संस्कृति विभाग में सूचीबद्ध करना तथा उन्हें उचित मंच प्रदान करना रहा। यह ऑडिशन कार्यक्रम आज अल्मोड़ा स्थित उदय शंकर नाट्य अकादमी में संपन्न हुआ, जहां जनपद के अलग-अलग क्षेत्रों से आए लोक कलाकारों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक द्वीप प्रज्वलन के साथ किया गया, जिससे आयोजन को सांस्कृतिक गरिमा और औपचारिकता मिली। शुभारंभ के बाद मंच पर लोक संगीत, पारंपरिक गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू हुआ, जिसने पूरे परिसर को लोक रंगों से सराबोर कर दिया। ऑडिशन में प्रतिभाग कर रहे कलाकारों ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से पहाड़ी लोक संस्कृति, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और लोक गीतों की समृद्ध परंपरा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने कार्यक्रम में प्रतिभाग किया और लोक कलाकारों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ जनपद की लोक संस्कृति को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जिलाधिकारी ने कलाकारों को संबोधित करते हुए कहा कि लोक कला हमारी सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर है, जिसे संजोकर रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कलाकारों को शुभकामनाएं देते हुए यह भी कहा कि अपनी कला को निरंतर निखारने के लिए नियमित अभ्यास और समर्पण आवश्यक है।
दो दिवसीय इस ऑडिशन कार्यक्रम में जनपद के दूरस्थ एवं शहरी क्षेत्रों से आए लोक कलाकारों और सांस्कृतिक दलों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने लोक गीतों, पारंपरिक नृत्यों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी कला का प्रदर्शन किया। इन प्रस्तुतियों में स्थानीय बोली-भाषा, रीति-रिवाज और लोक जीवन की झलक साफ तौर पर देखने को मिली, जिसने दर्शकों और निर्णायक मंडल को विशेष रूप से प्रभावित किया।
राजकीय संग्रहालय के निदेशक डॉ. सी.एस. चौहान ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस ऑडिशन का मुख्य लक्ष्य लोक कलाकारों को पहचान दिलाना और उन्हें संस्कृति विभाग के माध्यम से उचित मंच प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि जब कलाकारों को सरकारी स्तर पर सूचीबद्ध किया जाता है, तो उन्हें भविष्य में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, महोत्सवों और आयोजनों में भाग लेने के अधिक अवसर मिलते हैं। इससे न केवल कलाकारों को प्रोत्साहन मिलता है, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और संवर्धन भी सुनिश्चित होता है।
डॉ. चौहान ने यह भी बताया कि लोक कलाकारों को मंच उपलब्ध कराना और उनकी प्रतिभा को सामने लाना संग्रहालय एवं संस्कृति विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी को भी अपनी लोक संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है, जिससे सांस्कृतिक परंपराएं जीवित रहती हैं।
जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में उदय शंकर नाट्य अकादमी को अल्मोड़ा जनपद की एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक संस्था बताते हुए इसके बेहतर उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि अकादमी के सदुपयोग के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि यहां नियमित रूप से सांस्कृतिक, नाट्य और अन्य रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जा सके। इससे स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ आम जनता को भी इस संस्थान का लाभ मिलेगा और सांस्कृतिक गतिविधियों को निरंतर गति मिल सकेगी।
कार्यक्रम के दौरान निर्णायक मंडल द्वारा कलाकारों की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया गया। निर्णायक मंडल में संस्कृति विभाग के अनुभवी कार्मिक शामिल रहे, जिन्होंने कलाकारों की गायन शैली, प्रस्तुति, पारंपरिकता और मंच प्रदर्शन के आधार पर उनका आकलन किया। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में लोक कलाकार, संस्कृति विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और कला प्रेमी उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर, पं. गोविंद बल्लभ पंत राजकीय संग्रहालय के तत्वावधान में आयोजित यह ऑडिशन कार्यक्रम लोक कला और लोक कलाकारों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ। इस तरह के आयोजन न केवल कलाकारों को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि जनपद की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं। उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में भी ऐसे प्रयास लगातार किए जाएंगे, जिससे उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपराएं आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुंच सकें।