
अल्मोड़ा— जनपद अल्मोड़ा में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने जनवरी, फरवरी एवं मार्च 2026 के लिए क्षेत्र पंचायत बैठकों का विस्तृत रोस्टर जारी कर दिया है। इस रोस्टर के माध्यम से जनपद के सभी विकासखण्डों में निर्धारित तिथियों पर क्षेत्र पंचायत की बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिनमें विकास कार्यों, योजनाओं की समीक्षा तथा जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण पर विशेष जोर दिया जाएगा।
जिलाधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि 23 जनवरी 2026 को विकासखण्ड भैसियाछाना, 28 जनवरी 2026 को ताकुला तथा 30 जनवरी 2026 को ताड़ीखेत में क्षेत्र पंचायत की बैठक आहूत की जाएगी। इसके बाद 06 फरवरी 2026 को चौखुटिया, 12 फरवरी 2026 को धौलादेवी, 16 फरवरी 2026 को द्वाराहाट तथा 26 फरवरी 2026 को हवालबाग विकासखण्ड में बैठक आयोजित की जाएगी।
इसी क्रम में मार्च माह के लिए भी तिथियां निर्धारित कर दी गई हैं। 06 मार्च 2026 को लमगड़ा, 20 मार्च 2026 को सल्ट तथा 30 मार्च 2026 को भिकियासैंण विकासखण्ड में क्षेत्र पंचायत की बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों के माध्यम से विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा, नई योजनाओं का अनुमोदन तथा स्थानीय स्तर पर सामने आ रही समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि शासन के निर्देशानुसार समस्त जिला स्तरीय अधिकारियों की इन बैठकों में नियमित उपस्थिति अनिवार्य होगी। सभी विभागीय अधिकारी अपने-अपने विभाग से संबंधित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की पूर्ण जानकारी के साथ बैठक में प्रतिभाग करेंगे, ताकि ग्राम स्तर और खण्ड स्तर की समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया जा सके। उन्होंने कहा कि क्षेत्र पंचायत की बैठकें केवल औपचारिकता न होकर जमीनी स्तर पर शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन का सशक्त माध्यम हैं।
उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि यदि किसी अधिकारी के लिए अपरिहार्य कारणों से बैठक में उपस्थित होना संभव न हो, तो वह इसकी लिखित अनुमति जिलाधिकारी कार्यालय से अनिवार्य रूप से प्राप्त करेगा। साथ ही संबंधित क्षेत्र पंचायत के सचिव अथवा खण्ड विकास अधिकारी के माध्यम से क्षेत्र पंचायत को भी इसकी सूचना देना सुनिश्चित करेगा, ताकि बैठक की कार्यवाही बाधित न हो।
जिलाधिकारी ने जनपद के सभी खण्ड विकास अधिकारियों को भी सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने विकासखण्ड में आयोजित होने वाली प्रत्येक क्षेत्र पंचायत बैठक की तिथि, समय, स्थान एवं एजेण्डा की सूचना निर्धारित समयावधि के भीतर जनपद के समस्त विभागीय अधिकारियों एवं माननीय जनप्रतिनिधियों को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं। इसके अतिरिक्त प्रत्येक बैठक के सम्पन्न होने के तीन दिन के भीतर उन विभागीय अधिकारियों या प्रतिनिधियों की सूची मुख्यालय को उपलब्ध कराई जाएगी, जिनकी अनुपस्थिति के कारण सदन में विभागीय कार्यक्रमों की चर्चा या समीक्षा प्रभावित हुई हो, ताकि उनके विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही की जा सके।
जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि कई बार यह देखा गया है कि क्षेत्र पंचायत बैठकों में समस्याओं के निराकरण हेतु प्राप्त प्रार्थना पत्रों को कुछ खण्ड विकास अधिकारी बिना सदन में विधिवत चर्चा कराए सीधे मुख्यालय भेज देते हैं। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि सभी ऐसे प्रस्तावों पर पहले सदन में चर्चा कराई जाए, तत्पश्चात स्वीकृत प्रस्तावों को प्रस्ताव संख्या सहित संबंधित विभाग को अग्रिम कार्यवाही हेतु प्रेषित किया जाए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्र पंचायत को अपनी कार्ययोजना के अनुमोदन एवं समीक्षा के लिए रोस्टर में घोषित तिथियों के अतिरिक्त भी बैठकें आयोजित करने की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में क्षेत्र पंचायत अपनी सुविधा अनुसार बैठक कर सकती है, हालांकि इन अतिरिक्त बैठकों में विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य नहीं होगी।
जिलाधिकारी द्वारा जारी किए गए इन निर्देशों से स्पष्ट है कि जनपद में विकास कार्यों की निगरानी और जनसमस्याओं के समाधान को लेकर प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। निर्धारित समय पर बैठकें आयोजित कर, अधिकारियों की जवाबदेही तय कर और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाकर शासन-प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।