
चम्पावत – जनपद चम्पावत में वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्रस्तुत दावों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी मनीष कुमार के निर्देश पर सोमवार को जिलाधिकारी कार्यालय में अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2007 के तहत प्राप्त सामुदायिक एवं व्यक्तिगत दावों की समीक्षा हेतु जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई।
बैठक में जिला समाज कल्याण अधिकारी द्वारा जानकारी दी गई कि टनकपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम चंदनी (हेलागोठ) से 16 जून 2022 को कुल 17 व्यक्तिगत वन अधिकार दावे प्रस्तुत किए गए थे। इन दावों की समीक्षा जिला स्तरीय वन अधिकार समिति द्वारा की गई।
समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि दावाकर्ताओं द्वारा अधिनियम में निर्धारित शर्तों के अनुरूप तीन पीढ़ियों से निवास अथवा 13 दिसंबर 2005 तक निरंतर 75 वर्षों के निवास एवं वन संसाधनों पर आधारित आजीविका से संबंधित कोई ठोस एवं प्रमाणिक अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए।
उपरोक्त तथ्यों के आधार पर सभी 17 दावों को आवश्यक परीक्षण एवं पुनर्विचार के लिए उपजिलाधिकारी एवं अध्यक्ष, उपखंड स्तरीय वन अधिकार समिति पूर्णागिरि (टनकपुर) को वापस भेज दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, प्रभागीय वन अधिकारी तराई पूर्वी वन प्रभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए अभिलेखों के अनुसार यह भी सामने आया है कि संबंधित दावाकर्ताओं के पास अन्य स्थानों पर आवासीय एवं जीविकोपार्जन से जुड़ी संपत्तियाँ मौजूद हैं।
प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं तथ्यपरक जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी के निर्देश पर उपजिलाधिकारी लोहाघाट की अध्यक्षता में एक जांच समिति का गठन किया गया है। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वह दावाकर्ताओं की संपत्तियों, उपलब्ध अभिलेखों एवं अन्य संबंधित तथ्यों की जांच कर दो दिवस के भीतर अपनी संयुक्त रिपोर्ट जिलाधिकारी एवं जिला समाज कल्याण अधिकारी, चम्पावत को प्रस्तुत करे, ताकि आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जा सके।
यह बैठक वन अधिकार अधिनियम के प्रभावी, पारदर्शी और न्यायोचित क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई। बैठक में एसडीओ फॉरेस्ट सुनील कुमार, डीपीआरओ महेश कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी किशन सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।