
अल्मोड़ा- आज जिला कार्यालय सभागार में आयोजित सेवा का अधिकार अधिनियम की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने एक बार फिर स्पष्ट संदेश दिया — “जनसेवा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा दी जा रही सेवाओं की स्थिति और लंबित शिकायतों की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि “सेवा का अधिकार केवल एक अधिनियम नहीं, बल्कि शासन की मूल भावना है।” उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नागरिकों को उनकी सेवाएं निर्धारित समय सीमा में, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण ढंग से उपलब्ध कराई जाएं।
उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में कहा, “हीला-हवाली या टालमटोल की प्रवृत्ति किसी भी स्तर पर असहनीय है। जनता का हक छीनने वालों पर कार्रवाई तय है।”
जिलाधिकारी ने यह भी जोड़ा कि प्रत्येक अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि शासन की योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक समय से पहुंचे।
सिंह ने आगे कहा कि सभी कार्यालयों में सेवा का अधिकार अधिनियम से संबंधित सूचना बोर्ड अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किए जाएं, ताकि आमजन को यह पता रहे कि कौन सी सेवा कितने समय में और किस अधिकारी से प्राप्त हो सकती है।
उन्होंने कहा —
“शासन की प्राथमिकता है कि हर नागरिक को उसका वैधानिक अधिकार सहज, सुलभ और पारदर्शी तरीके से मिले। इसके लिए अधिकारियों को संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व के साथ कार्य करना होगा।”
बैठक में अपर जिलाधिकारी युक्ता मिश्र, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन चंद्र तिवारी, जिला विकास अधिकारी एस.के. पंत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।