सोना २ लाख रुपये तोले के पास :सफेद धातु का नया कीर्तिमान: 3,85,000 रुपये प्रति किलो पर पहुंची चांदी की कीमतें

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नई दिल्ली/मुंबई: भारतीय सर्राफा बाजार और शेयर बाजार के लिए पिछला कारोबारी सत्र ऐतिहासिक रहा। वैश्विक स्तर पर डॉलर की कमजोरी और निवेशकों के बीच सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग ने सोने और चांदी की कीमतों को एक ऐसे मुकाम पर पहुँचा दिया है, जिसकी कल्पना कुछ समय पहले तक नहीं की गई थी। सोने की कीमत जहाँ 1,71,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर को छू गई है, वहीं चांदी ने 3,85,000 रुपये प्रति किलोग्राम का आंकड़ा पार कर सबको चौंका दिया है। दूसरी ओर, भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते की सकारात्मक खबरों ने शेयर बाजार में भी जान फूंक दी है, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी लगातार दूसरे दिन हरे निशान पर बंद हुए।

कीमतों में उछाल का पूरा घटनाक्रम

बाजार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी गई है। चांदी ने लगातार तीसरे दिन अपनी बढ़त जारी रखते हुए 15,000 रुपये या लगभग 4.05 प्रतिशत की भारी उछाल दर्ज की। इस वृद्धि के साथ चांदी अब 3,85,000 रुपये प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है। पिछले कारोबारी सत्र में यह 3,70,000 रुपये पर थी, जो खुद अपने आप में एक ऊंचा स्तर था।

सोने की बात करें तो, इसमें भी 5,000 रुपये या करीब 3 प्रतिशत की तेजी आई। इस उछाल के बाद सोना 1,71,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। मंगलवार को यह कीमती धातु 1,66,000 रुपये पर बंद हुई थी। मात्र 24 घंटों के भीतर प्रति 10 ग्राम पर 5,000 रुपये की यह बढ़त निवेशकों और आम ग्राहकों के लिए चिंता और उत्साह दोनों का विषय बनी हुई है।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम? कारण और परिस्थितियाँ

बाजार विशेषज्ञों और एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी के अनुसार, इस तेजी के पीछे कई बड़े कारक काम कर रहे हैं:

  1. भू-राजनीतिक तनाव: वैश्विक स्तर पर चल रहे युद्ध और तनावपूर्ण स्थितियों ने निवेशकों को डरा दिया है। जब भी दुनिया में अस्थिरता बढ़ती है, निवेशक शेयर या करेंसी के बजाय सोने को सबसे सुरक्षित मानते हैं।

  2. कमजोर डॉलर: अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कीमत कम होने से सोने की मांग बढ़ जाती है, क्योंकि अन्य मुद्राओं वाले देशों के लिए इसे खरीदना सस्ता हो जाता है।

  3. केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: दुनिया भर के विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।

  4. भारत-ईयू व्यापार समझौता: भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर जो बातचीत चल रही है, उसने बाजार में सकारात्मक धारणा बनाई है। इसी का असर है कि सेंसेक्स 487.20 अंक चढ़कर 82,344.68 पर बंद हुआ।

शेयर बाजार का हाल

कीमती धातुओं के साथ-साथ शेयर बाजार में भी रौनक रही। बीएसई सेंसेक्स दिन के दौरान 646.49 अंक तक ऊपर चला गया था, लेकिन अंत में यह 487 अंकों की बढ़त के साथ स्थिर हुआ। एनएसई निफ्टी भी 167.35 अंक बढ़कर 25,342.75 पर बंद हुआ। विशेष रूप से भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों में दिसंबर तिमाही के नतीजों के बाद लगभग 9 प्रतिशत की तेजी देखी गई। इसके अलावा बजाज फाइनेंस, पावर ग्रिड, महिंद्रा एंड महिंद्रा और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे बड़े शेयरों में भी खरीदारी का रुझान रहा।

आम आदमी और पाठकों पर क्या होगा असर?

सोने और चांदी की इन कीमतों का सीधा असर मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ता है, विशेषकर उन घरों में जहां शादियां तय हैं।

  • शादियों का बजट: अब जेवर बनवाना काफी महंगा हो गया है। जो बजट लोगों ने कुछ महीने पहले तय किया था, वह अब काफी छोटा पड़ने लगा है।

  • निवेश का नजरिया: जो लोग पारंपरिक रूप से सोने में निवेश करते आए हैं, उनके लिए यह समय ‘मुनाफा वसूली’ (Profit Booking) का हो सकता है, लेकिन नए खरीदारों के लिए यह स्तर काफी जोखिम भरा नजर आ रहा है।

  • महंगाई का संकेत: कीमती धातुओं के दाम बढ़ना अक्सर व्यापक महंगाई का संकेत माना जाता है, जिससे आने वाले समय में अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव दिख सकता है।

आगे क्या बदलेगा?

आने वाले हफ्तों में बाजार की नजर अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों और मध्य पूर्व के तनाव पर रहेगी। यदि भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ नहीं सुधरती हैं, तो सोने की कीमतों में और अधिक उछाल से इनकार नहीं किया जा सकता। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि ‘करेक्शन’ यानी कीमतों में थोड़ी गिरावट की संभावना बनी रहती है, लेकिन दीर्घकालिक ट्रेंड अभी भी मजबूती की ओर ही संकेत कर रहा है।

निष्कर्ष: जनहित का नजरिया

वर्तमान बाजार स्थिति को देखते हुए आम निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। सोने और चांदी के दाम अपनी ‘पीक’ पर हैं, ऐसे में बिना सोचे-समझे बड़ी खरीदारी जोखिम भरी हो सकती है। हालांकि, शेयर बाजार में स्थिरता और भारत-ईयू जैसे समझौतों से अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है, जिसका लाभ परोक्ष रूप से रोजगार और व्यापार क्षेत्र को मिलेगा। आम नागरिक को चाहिए कि वह अपने वित्तीय पोर्टफोलियो में विविधता रखे और केवल एक ही एसेट क्लास (जैसे सिर्फ सोना) पर निर्भर न रहे।

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