
उत्तराखंड के सीमांत जनपद चम्पावत के बाराकोट ब्लॉक से एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहां एक परिवार न केवल गंभीर बीमारी से जूझ रहा है, बल्कि नियति की दोहरी मार ने उन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़कर रख दिया है। ग्राम सभा बैड़ा बैड़वाल की रहने वाली जानकी देवी पिछले लंबे समय से जानलेवा कैंसर की चपेट में हैं।
संघर्ष और त्रासदी का पूरा घटनाक्रम
जानकी देवी के संघर्ष की कहानी साल 2023 में शुरू हुई थी, जब शुरुआती जांच में पता चला कि वह लिवर कैंसर से ग्रसित हैं। परिवार ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार हर संभव प्रयास किया और उनका उपचार शुरू कराया। उम्मीद थी कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति से वह स्वस्थ हो जाएंगी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। 2023 में कराया गया उपचार पूरी तरह सफल नहीं हो सका और धीरे-धीरे कैंसर ने उनके पूरे शरीर को अपनी चपेट में ले लिया।
अभी परिवार इस शारीरिक कष्ट से लड़ ही रहा था कि साल 2024 में एक और वज्रपात हुआ। जानकी देवी के पति विक्रम सिंह अधिकारी का आकस्मिक निधन हो गया। घर के कमाऊ सदस्य के चले जाने से न केवल भावनात्मक सहारा छीन गया, बल्कि आय का स्रोत भी पूरी तरह बंद हो गया। आज स्थिति यह है कि जानकी देवी गंभीर हालत में हैं।
बेटे के कंधों पर जिम्मेदारियों का भारी बोझ
विक्रम सिंह अधिकारी के निधन के बाद उनके बेटे पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। महज एक युवा उम्र में उसके कंधों पर न केवल अपनी बीमार मां के इलाज का जिम्मा है, बल्कि घर में मौजूद वृद्ध दादा-दादी और अपने छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी भी है। एक ओर बीमार मां की दवाइयों और कीमोथेरेपी का खर्च है, तो दूसरी ओर बुजुर्गों की देखभाल और छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई-लिखाई।
परिजनों के अनुसार, बेटे ने अपनी मां को बचाने के लिए अब तक की अपनी सारी जमापूंजी और घर की बचत लगा दी है। रिश्तेदारों और करीबियों से भी जितनी मदद हो सकती थी, वह ली जा चुकी है। अब हालात ऐसे बन गए हैं कि आगे का उपचार जारी रखने के लिए उनके पास कोई वित्तीय संसाधन शेष नहीं बचा है।
इलाज में आ रही बाधाएं और वर्तमान आवश्यकता
कैंसर जैसी बीमारी का इलाज बेहद खर्चीला होता है। रिपोर्टों के अनुसार, जानकी देवी का कैंसर अब शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल चुका है (Metastasis), जिसके लिए विशेष दवाओं और लंबे समय तक चलने वाले उपचार की आवश्यकता है। अस्पताल के खर्च, नियमित जांच और महंगी दवाओं ने परिवार की कमर तोड़ दी है।
ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण संसाधन सीमित हैं और जिला स्तर पर इस तरह की गंभीर बीमारी का पूर्ण उपचार संभव नहीं है। इसके लिए उन्हें बड़े शहरों या निजी संस्थानों का रुख करना पड़ता है, जहां का खर्च उठा पाना अब इस परिवार के लिए नामुमकिन साबित हो रहा है।
जनता और समाज पर प्रभाव
पहाड़ के गांवों में इस तरह के मामले अक्सर सामने आते हैं, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और गरीबी के कारण लोग गंभीर बीमारियों के आगे घुटने टेक देते हैं। जानकी देवी का मामला समाज की संवेदनशीलता की परीक्षा है। जब एक परिवार पूरी तरह टूट चुका हो, तब समाज का सहयोग ही उन्हें दोबारा खड़ा कर सकता है। यह खबर केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह अपील है उन तमाम लोगों से जो मानवता में विश्वास रखते हैं।
आगे की राह और पाठकों की भूमिका
जानकी देवी को बचाने के लिए अब केवल दुआएं काफी नहीं हैं, बल्कि आर्थिक सहयोग की सख्त जरूरत है। आपका एक छोटा सा अंशदान इस परिवार को नई जिंदगी दे सकता है। मदद की राशि कितनी भी छोटी क्यों न हो, वह इस समय उनके लिए संजीवनी का काम करेगी।
सहयोग हेतु बैंक विवरण:
-
नाम: जानकी देवी (या परिवार के अधिकृत खाते के अनुसार)
-
बैंक का नाम: SBI (भारतीय स्टेट बैंक)
-
IFSC कोड: SBIN0007437
-
खाता संख्या: 43056878617
-
संपर्क नंबर: 7248206446
-
पता: ग्राम सभा – बैड़ा बैड़वाल, ब्लॉक – बाराकोट, जिला – चम्पावत।
निष्कर्ष: मानवता के नाते हाथ बढ़ाएं
देवभूमि की परंपरा हमेशा से एक-दूसरे की मदद करने की रही है। चम्पावत के इस सुदूर गांव के परिवार को आज आपकी सबसे ज्यादा जरूरत है। एक बेटा अपनी मां को बचाने की जंग लड़ रहा है, एक छोटे भाई-बहन अपनी मां की ममता को खोने से डर रहे हैं और बुजुर्ग दादा-दादी अपनी ढलती उम्र में इस त्रासदी को देख रहे हैं। यदि हम सब मिलकर थोड़ा-थोड़ा योगदान दें, तो जानकी देवी को उचित इलाज मिल सकता है और यह परिवार फिर से मुस्कुरा सकता है। कृपया अपनी स्वेच्छा और क्षमता के अनुसार मदद करें।