
नैनीताल। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। नैनीताल जनपद के धारी, ओखलकाण्डा और रामगढ़ विकासखंडों में आदमखोर वन्यजीव की बढ़ती सक्रियता और स्थानीय निवासियों पर हो रहे हमलों के मद्देनजर जिला प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़ा कदम उठाया है । जिला मजिस्ट्रेट ललित मोहन रयाल ने इन क्षेत्रों के सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में 19 जनवरी से 21 जनवरी 2026 तक तीन दिनों के अवकाश की घोषणा की है ।
सुनसान रास्तों पर मासूमों की सुरक्षा पर मंडरा रहा था खतरा
पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां मैदानी इलाकों से काफी अलग और चुनौतीपूर्ण होती हैं। धारी, ओखलकाण्डा और रामगढ़ जैसे क्षेत्रों में बच्चों को स्कूल या आंगनबाड़ी केंद्र पहुँचने के लिए अक्सर घने जंगलों, सुनसान पगडंडियों और वीरान रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है । हाल के दिनों में इन इलाकों में हिंसक वन्यजीवों की आवाजाही काफी बढ़ गई है, जिससे अकेले आवागमन कर रहे छोटे बच्चों और छात्रों की जान पर गंभीर खतरा बना हुआ था । किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने अस्थायी रूप से शैक्षणिक गतिविधियों को स्थगित करना ही बेहतर समझा है ।
इन संस्थानों पर लागू होगा आदेश
जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह अवकाश केवल छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि संबंधित विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी समान रूप से लागू होगा । इस आदेश के दायरे में आने वाले संस्थान इस प्रकार हैं:विकासखंड धारी, ओखलकाण्डा और रामगढ़ के समस्त सरकारी विद्यालय ।
- सभी सहायता प्राप्त और निजी स्कूल (कक्षा 1 से 12 तक) ।
- क्षेत्र के सभी आंगनबाड़ी केंद्र ।
- प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अवकाश की इस अवधि के दौरान किसी भी स्थिति में बच्चों को स्कूल या केंद्र पर नहीं बुलाया जाएगा ।
वन विभाग और पुलिस के साथ मिलकर होगी समीक्षा
प्रशासन केवल अवकाश घोषित कर शांत नहीं बैठा है। वन्यजीवों के खतरे को कम करने के लिए जिला प्रशासन, वन विभाग, पुलिस और आपदा प्रबंधन टीम के साथ मिलकर लगातार संपर्क में है । स्थिति की पल-पल की समीक्षा की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जब बच्चे दोबारा स्कूल लौटें, तो वे पूरी तरह सुरक्षित हों । आदेश में यह भी कहा गया है कि हालात सामान्य होने पर स्कूल खोलने के संबंध में अलग से जानकारी दी जाएगी ।
अभिभावकों को समय पर सूचना देने के निर्देश
जिला प्रशासन ने मुख्य शिक्षाधिकारी और जिला कार्यक्रम अधिकारी को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि इस अवकाश की जानकारी समय रहते हर बच्चे के अभिभावक तक पहुँच जाए । आदेश के अनुपालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी ।
आम जनजीवन पर असर और बचाव के उपाय
इस फैसले से हजारों छात्र प्रभावित होंगे, लेकिन उनकी जान की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा गया है। स्थानीय निवासियों को भी सलाह दी गई है कि वे सुबह और शाम के समय अकेले जंगलों की ओर न जाएं और सतर्क रहें। प्रशासन का यह कदम वन्यजीव संघर्ष को रोकने की दिशा में एक निवारक उपाय के रूप में देखा जा रहा है।