देवभूमि का मान: पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी और पत्रकार कैलाश पंत को पद्म पुरस्कारों का एलान रोहित शर्मा भी शामिल

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नई दिल्ली/देहरादून। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इस बार की सूची में कला, समाज सेवा और सार्वजनिक जीवन में अमूल्य योगदान देने वाली विभूतियों को प्राथमिकता दी गई है। भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र देयोल और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन समेत पांच प्रमुख हस्तियों को देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से नवाजा जाएगा। वहीं, देवभूमि उत्तराखंड के लिए भी यह गौरव का क्षण है, क्योंकि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को ‘पद्म भूषण’ और वरिष्ठ पत्रकार कैलाश चंद्र पंत को ‘पद्मश्री’ देने का एलान हुआ है। इस वर्ष कुल 132 हस्तियों को इन नागरिक सम्मानों के लिए चुना गया है, जिनमें 45 ऐसे नाम शामिल हैं जिन्होंने गुमनामी में रहकर समाज के लिए असाधारण कार्य किए हैं।

पुरस्कारों का पूरा घटनाक्रम और प्रमुख नाम

गृह मंत्रालय द्वारा जारी सूची के अनुसार, इस साल के पद्म पुरस्कारों में विविधता और समावेशिता पर विशेष जोर दिया गया है। ‘पद्म विभूषण’ की सूची में दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र देयोल, माकपा नेता और केरल के पूर्व सीएम वी.एस. अच्युतानंदन (मरणोपरांत), सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज एम. फातिमा बीवी (मरणोपरांत), प्रसिद्ध वायलिन वादक एन. राजम और मलयाली लेखक पी. नारायणन के नाम शामिल हैं।

‘पद्म भूषण’ सम्मान के लिए कुल 13 हस्तियों को चुना गया है। इनमें उत्तराखंड के पूर्व राज्यपाल और मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन (मरणोपरांत), प्रसिद्ध गायिका अलका याग्निक, अभिनेता ममूटी और भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रोहित शर्मा का नाम प्रमुखता से उभरा है। इसके अलावा, चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ. नोरी दत्तात्रेयु और व्यापार जगत से उदय कोटक को भी इस सम्मान से नवाजा जाएगा।

उत्तराखंड की झोली में दो बड़े सम्मान

बागेश्वर जिले के लिए 25 जनवरी का दिन ऐतिहासिक रहा। जिले के दो सपूतों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। कपकोट के खैमिला गांव में जन्मे भगत सिंह कोश्यारी को उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और प्रशासनिक सेवाओं के लिए ‘पद्म भूषण’ दिया जाएगा। कोश्यारी उत्तराखंड के दूसरे मुख्यमंत्री रहने के साथ-साथ महाराष्ट्र और गोवा के राज्यपाल की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

वहीं, बागेश्वर के ही कांडा तहसील क्षेत्र के खंतोली गांव के मूल निवासी कैलाश चंद्र पंत को ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया जाएगा। वर्तमान में मध्य प्रदेश के महू में रह रहे पंत ने पत्रकारिता, शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में पांच दशकों से अधिक समय तक सक्रिय रहकर उल्लेखनीय कार्य किया है। उनके इस सम्मान से पूरे उत्तराखंड और विशेषकर बागेश्वर जिले में खुशी की लहर है।

गुमनाम नायकों की पहचान: 45 हस्तियों को पद्मश्री

इस साल के पुरस्कारों की सबसे बड़ी विशेषता ‘गुमनाम नायकों’ (Unsung Heroes) को दिया गया सम्मान है। पद्मश्री पाने वाले 113 लोगों में से 45 ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने बिना किसी प्रचार के समाज की सेवा की है। इसमें कर्नाटक के अंके गौड़ा शामिल हैं जिन्होंने दुनिया का सबसे बड़ा मुफ्त पुस्तकालय स्थापित किया। एशिया का पहला ‘ह्यूमन मिल्क बैंक’ बनाने वाली डॉ. अरमिडा फर्नांडीज और कालाजार जैसी बीमारी का सस्ता जांच किट तैयार करने वाले श्याम सुंदर को भी सम्मानित किया गया है। आदिवासी लोक कला को जीवित रखने वाले 90 वर्षीय भिकल्य लडक्या धिंडा और मणिपुर के लोक कलाकार युमनाम जात्रा सिंह जैसे नामों ने इस सूची को और भी समृद्ध बनाया है।

जनता और समाज पर प्रभाव

इन पुरस्कारों का चयन समाज को एक सकारात्मक संदेश देता है। जब रोहित शर्मा और हरमनप्रीत कौर जैसे खिलाड़ियों को पद्म पुरस्कार मिलता है, तो यह युवाओं को खेल के प्रति प्रेरित करता है। वहीं, जब भगत सिंह कोश्यारी जैसे वरिष्ठ राजनेताओं या कैलाश चंद्र पंत जैसे कलमकारों को सम्मानित किया जाता है, तो यह सार्वजनिक जीवन में शुचिता और बौद्धिक संपदा के महत्व को रेखांकित करता है। इन पुरस्कारों से आम जनता में यह विश्वास पैदा होता है कि यदि कार्य पूरी निष्ठा और ईमानदारी से किया जाए, तो राष्ट्र उसे सम्मान जरूर देता है।

भविष्य की राह और बदलाव

पद्म पुरस्कारों की प्रक्रिया अब अधिक पारदर्शी और जन-केंद्रित हो गई है। पहले ये पुरस्कार अक्सर बड़े शहरों और रसूखदार लोगों तक सीमित रहते थे, लेकिन अब सुदूर गांवों के कलाकार और समाजसेवियों को भी मुख्यधारा में जगह मिल रही है। यह बदलाव आने वाले समय में जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाएगा। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए यह गर्व की बात है कि वहां की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय पटल पर स्थान मिल रहा है, जिससे राज्य की संस्कृति और योगदान की पहचान वैश्विक स्तर पर और मजबूत होगी।

निष्कर्ष: जनहित का नजरिया

नागरिक सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होते, बल्कि वे एक आदर्श समाज के निर्माण की दिशा में मील के पत्थर होते हैं। धर्मेंद्र की अदाकारी से लेकर कोश्यारी की राजनीति और कैलाश पंत की पत्रकारिता तक, यह सूची भारत की विविधतापूर्ण मेधा का प्रतिबिंब है। गुमनाम नायकों को सम्मान देना यह दर्शाता है कि लोकतंत्र में अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के योगदान की भी कीमत है। यह सम्मान समारोह न केवल विजेताओं का अभिनंदन है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा पुंज भी है।

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