ड्रग फ्री देवभूमि अभियान के तहत लोहाघाट और बाराकोट में प्रशासन का बड़ा एक्शन, दो मेडिकल स्टोर सील

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चम्पावत – जनपद चम्पावत में “ड्रग फ्री देवभूमि” अभियान के अंतर्गत नशीली दवाओं के अवैध कारोबार के खिलाफ प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए लोहाघाट और बाराकोट क्षेत्रों में व्यापक औचक निरीक्षण अभियान चलाया। जिलाधिकारी मनीष कुमार के निर्देशों के क्रम में मंगलवार को उपजिलाधिकारी नीतू डांगर और मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. देवेश चौहान के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने विभिन्न मेडिकल स्टोरों, जनऔषधि केंद्रों और क्लीनिकों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई में औषधि नियंत्रण विभाग, तहसील प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस विभाग के अधिकारी शामिल रहे।

अभियान के दौरान क्षेत्र में हड़कंप की स्थिति देखने को मिली। निरीक्षण के समय कुल 7 मेडिकल स्टोर खुले पाए गए, जबकि 3 मेडिकल स्टोर संचालक टीम के पहुंचने की सूचना मिलते ही अपनी दुकानें बंद कर मौके से फरार हो गए। प्रशासन ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध अलग से जांच प्रक्रिया शुरू करने के संकेत दिए हैं।

संयुक्त टीम द्वारा की गई जांच के दौरान दो मेडिकल स्टोरों में अत्यंत गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। दस्तावेजों और दवाओं के स्टॉक में गड़बड़ी सामने आने पर टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों प्रतिष्ठानों को तहसील प्रशासन के सहयोग से सील कर दिया। साथ ही इन दुकानों के लाइसेंस निलंबन या निरस्तीकरण की संस्तुति उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों के उल्लंघन को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

निरीक्षण के दौरान सभी मेडिकल स्टोरों में दवाओं के स्टॉक का सत्यापन किया गया। यह सुनिश्चित किया गया कि दवाओं का क्रय-विक्रय केवल वैध लाइसेंस के अंतर्गत और पंजीकृत फार्मासिस्ट की अनिवार्य उपस्थिति में ही हो। टीम ने रजिस्टर, बिल बुक और स्टॉक विवरण की बारीकी से जांच की। कई स्थानों पर रिकॉर्ड संतोषजनक पाए गए, जबकि कुछ को सुधार के निर्देश दिए गए।

प्रशासन ने सभी संचालकों को निर्देशित किया कि दुकानों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाएं और उनकी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाए। इसके अतिरिक्त प्रत्येक दवा बिक्री पर विधिवत कैश मेमो जारी करना और उसका पूरा रिकॉर्ड संधारित करना अनिवार्य बताया गया। अधिकारियों ने कहा कि रिकॉर्ड की पारदर्शिता से अवैध बिक्री और दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

औषधि निरीक्षक हर्षिता ने बताया कि मनःप्रभावी (Psychotropic) दवाएं और एंटीबायोटिक केवल डॉक्टर के वैध पर्चे के आधार पर ही बेची जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना चिकित्सकीय पर्चे के कोडीन युक्त कफ सिरप या अन्य नशीली दवाओं की बिक्री पाए जाने पर संबंधित संचालक के खिलाफ औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें लाइसेंस निलंबन, निरस्तीकरण और कानूनी अभियोजन जैसी कार्रवाई शामिल हो सकती है।

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. देवेश चौहान ने कहा कि नशीली दवाओं का दुरुपयोग समाज और विशेषकर युवाओं के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता युवाओं को नशे की प्रवृत्ति से बचाना और जनपद को नशामुक्त दिशा में आगे बढ़ाना है। इस उद्देश्य से नियमित निरीक्षण और प्रवर्तन अभियान आगे भी जारी रहेंगे।

उपजिलाधिकारी नीतू डांगर ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल औपचारिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि जनहित में चलाया जा रहा एक सतत प्रयास है। उन्होंने मेडिकल स्टोर संचालकों से अपील की कि वे नियमों का पालन करते हुए पारदर्शी ढंग से व्यवसाय करें और किसी भी प्रकार की अनियमितता से बचें।

प्रशासन ने आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। यदि किसी को बिना पर्चे के नशीली या प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री की जानकारी मिलती है, तो इसकी सूचना संबंधित विभाग को दें, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके।

“ड्रग फ्री देवभूमि” अभियान के तहत की गई इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि चम्पावत में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार पर सख्त नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने दोहराया है कि जनपद में युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे और ऐसी प्रवर्तन कार्यवाही भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगी।

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