जनता की राजधानी, या राजनीतिक वादा? कब मिलेगी उत्तराखण्ड को स्थायी राजधानी?

Responsive example

उत्तराखण्ड राज्य बने 25 वर्ष होने को आए, लेकिन स्थायी राजधानी का निर्णय अब भी लंबित है। इस प्रश्न का सबसे गहरा उत्तर जनता के मन में है—राजधानी गैरसैंण ही होनी चाहिए।
क्योंकि गैरसैंण सिर्फ एक स्थान नहीं, जनआंदोलन की भावनाओं की राजधानी है।


🌄 क्यों गैरसैंण?

  • उत्तराखण्ड मध्य हिमालय में स्थित राज्य है, और गैरसैंण भौगोलिक रूप से इसका मध्य बिंदु है।

  • पर्वतीय क्षेत्रों के विकास का सपना इसी से जुड़ा था।

  • राज्य आंदोलन के दौरान हजारों युवाओं ने गैरसैंण को राजधानी बनाने के लिए संघर्ष किया।

गैरसैंण इसलिए नहीं महत्वपूर्ण कि वह सुंदर है, बल्कि इसलिए कि उत्तराखण्ड की आत्मा वहीं बसती है।


📌 अब तक मुख्यमंत्रियों ने क्या किया? (संक्षिप्त तथ्य)

मुख्यमंत्री कार्यकाल गैरसैंण पर क्या किया?
नित्यानंद स्वामी (2000–2001) पहले मुख्यमंत्री गैरसैंण को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं।
भुवन चंद्र खंडूड़ी (2007–2012) सेना पृष्ठभूमि, सख्त फैसलों के लिए प्रसिद्ध गैरसैंण में विधानसभा भवन पर चर्चा आगे बढ़ी, लेकिन निर्णय नहीं।
रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ (2009–2011) पर्वतीय विकास समर्थक गैरसैंण के पास भराड़ीसैंण में विधानसभा भवन बनाने की मंज़ूरी दी, निर्माण कार्य आगे बढ़ा — यही सबसे बड़ा योगदान।
विजय बहुगुणा (2012–2014) सत्र आयोजित करने की बात हुई, पर राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं।
हरीश रावत (2014–2017) पहाड़ समर्थक छवि विधानसभा सत्र बुलाए, बजट भी पास हुआ। आंदोलन ने गति पकड़ी।
त्रिवेंद्र सिंह रावत (2017–2021) गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने की तैयारी, लेकिन पूर्ण रूप से नोटिफाई नहीं किया।
तिरथ सिंह रावत (2021) कार्यकाल छोटा, फैसला नहीं।
पुष्कर सिंह धामी (2021–अब तक) वर्तमान सीएम मार्च 2021 में विधानसभा ने प्रस्ताव पास कर गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया, पर स्थायी राजधानी बनाने पर कोई अंतिम निर्णय नहीं। भौतिक विकास भी धीमा है।

❓ सवाल यही है—

अगर विधानसभा है, सड़क है, मूलभूत आधार है—तो निर्णय क्यों नहीं?

उत्तर स्पष्ट है:
➡️ राजधानी का सवाल विकास का नहीं, राजनीति का बना दिया गया है।
हर सरकार ने इस मुद्दे को वादों और घोषणाओं में इस्तेमाल किया, लेकिन निर्णायक कदम से दूरी बनाई।


🏔️ गैरसैंण बने तो लाभ क्या?

✅ विकास केवल देहरादून या मैदानों में सीमित नहीं रहेगा
✅ पलायन कम होगा—सरकारी ऑफिस और नौकरियाँ पहाड़ की ओर बढ़ेंगी
✅ पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बाज़ार सब बढ़ेंगे

राजधानी वहीं बनती है, जहाँ राज्य भविष्य देखना चाहता है।
यदि भविष्य पहाड़ है—तो राजधानी गैरसैंण होना ही चाहिए।



निष्कर्ष

उत्तराखण्ड का सपना केवल राज्य बनना नहीं था, पहाड़ का विकास था।
गैरसैंण बनकर यह सपना पूरे राज्य के संतुलित विकास का द्वार खोल सकता है।

राजधानी गैरसैंण इसलिए होनी चाहिए, क्योंकि यह भौगोलिक सुविधा नहीं—आत्मसम्मान का निर्णय है।
निर्णय आज हो या कल—इतिहास यही लिखेगा कि जनता गैरसैंण के फैसले की प्रतीक्षा कर रही थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *