
चंपावत: सीमांत क्षेत्र चंपावत में सरकारी योजनाएं अब धरातल पर क्रियान्वित होती दिखाई दे रही हैं। इसी क्रम में, स्थानीय युवा किसानों ने रेशम उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘विकल्प रहित संकल्प’ के दृष्टिकोण के अंतर्गत, उत्तराखंड के सुदूर और सीमांत क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं का प्रभाव अब स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है। राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का सीधा और प्रभावी लाभ अब सीमांत क्षेत्रों के काश्तकारों तक सफलतापूर्वक पहुंच रहा है।
इसी कड़ी में, चंपावत जनपद की त्यारसौ ग्रामसभा से दो स्थानीय युवा किसानों ने सरकारी योजनाओं का प्रभावी ढंग से लाभ उठाया है। उन्होंने अत्यंत कम समय में ही एक सफल उदाहरण प्रस्तुत किया है। त्यारसौ ग्रामसभा के ये दो युवा किसान, भीम कुमार और नीरज माहरा, ने अपनी मेहनत, लगन और नवाचार के बल पर शहतूत आधारित रेशम कीटपालन के क्षेत्र में यह उपलब्धि हासिल की है।
बाटुली एफपीओ (कृषक उत्पादक संगठन) से जुड़े इन दोनों युवाओं ने रेशम विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए शहतूत के पौधों का रोपण किया। राज्य सरकार की कल्याणकारी नीतियों का लाभ उठाते हुए, उन्होंने मात्र 10 माह की अवधि के भीतर रेशम कोकून का व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया। शुरुआत में एक प्रायोगिक परियोजना के रूप में प्रारंभ किए गए इस प्रयास में, दोनों किसानों ने केवल 20 दिनों की अवधि में लगभग 12 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाले रेशम कोकून का उत्पादन किया। इस उत्पाद को रेशम विभाग द्वारा तत्काल क्रय कर लिया गया, जिससे किसानों को त्वरित आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ।
विभागीय अधिकारियों के आकलन के अनुसार, रेशम कीटपालन पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार का एक अत्यंत मजबूत और टिकाऊ माध्यम बनकर उभर रहा है। आने वाले समय में यह योजना न केवल किसानों की आजीविका में महत्वपूर्ण सुधार लाएगी, बल्कि पहाड़ों से होने वाले पलायन को रोकने में भी एक प्रभावी माध्यम सिद्ध हो सकती है।
बाटुली एफपीओ के माध्यम से क्षेत्र के अन्य किसानों को भी शहतूत के पौधों के रोपण और रेशम कीटपालन के लिए तैयार किया जा रहा है। इन किसानों को जल्द ही राज्य सरकार द्वारा विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा ताकि वे भी इस लाभदायक व्यवसाय से जुड़ सकें।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन में, रेशम विभाग सीमांत तथा ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर सक्रियता से कार्य कर रहा है।
त्यारसौ क्षेत्र के इन युवा किसानों की यह सफलता इस बात को प्रमाणित करती है कि राज्य सरकार की नीतियां केवल दस्तावेजीकरण तक सीमित नहीं हैं। इसके विपरीत, इन नीतियों का वास्तविक लाभ सुदूरवर्ती गांवों में रहने वाले अंतिम लाभार्थी तक सफलतापूर्वक पहुंच रहा है।