
चम्पावत: जनपद में आपदा प्रबंधन तंत्र को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से दिनांक 18 मार्च को प्रातः 9:00 बजे से एक वृहद आपदा पूर्वाभ्यास (मॉक ड्रिल) आयोजित किया जाएगा। यह पूर्वाभ्यास जिलाधिकारी मनीष कुमार के निर्देशन में विभिन्न स्थानों पर संचालित होगा।
यह अभ्यास राज्य आपदा परिचालन केंद्र, देहरादून के निर्देशों के अनुसार किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य संभावित आपदाओं के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया समय (रिस्पॉन्स टाइम) का आकलन करना है। इसके अतिरिक्त, सुरक्षा मानकों के प्रभावी अनुपालन तथा विभिन्न विभागों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी बल दिया जाएगा। इन प्रयासों के माध्यम से वास्तविक आपदा परिस्थितियों में त्वरित और प्रभावी राहत एवं बचाव कार्यों को सुनिश्चित किया जा सकेगा।
इस वृहद मॉक ड्रिल के अंतर्गत जनपद के पांच प्रमुख स्थानों पर विभिन्न आपदा परिदृश्यों का अभ्यास किया जाएगा। इनमें राष्ट्रीय राजमार्ग स्वाला में भूस्खलन से मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति, थवालखेड़ा में बाढ़ आपदा से निपटने के तरीके, लोहाघाट में भूकंप के बाद राहत एवं बचाव कार्यों का संचालन, बाराकोट में मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति का प्रबंधन तथा पाटी में वनाग्नि की रोकथाम एवं नियंत्रण से संबंधित परिदृश्य शामिल हैं।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को इस अभ्यास में पूर्ण गंभीरता से भाग लेने के निर्देश दिए हैं। इनमें पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य, अग्निशमन, वन विभाग तथा अन्य आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्मिक शामिल हैं। उन्हें आपसी समन्वय के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने और अभ्यास को वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप क्रियान्वित करने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही, सभी तहसीलों में स्थापित सैटेलाइट फोन को अनिवार्य रूप से क्रियाशील अवस्था में रखने तथा इंसिडेंट कमांडर (परगना मजिस्ट्रेट) द्वारा राहत एवं बचाव कार्यों से संबंधित सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
अभ्यास के सफलतापूर्वक समापन के पश्चात एक डी-ब्रीफिंग सत्र का आयोजन किया जाएगा। इस सत्र में मॉक ड्रिल के दौरान चिन्हित की गई कमियों एवं सामने आई चुनौतियों का गहन विश्लेषण किया जाएगा। इसके आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे, जिससे जनपद का आपदा प्रबंधन तंत्र और अधिक सुदृढ़ एवं सक्षम बन सके।
जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि इस मॉक ड्रिल के दौरान किसी भी प्रकार की घबराहट या भय न करें। यह केवल आपदा पूर्व तैयारी को मजबूत करने और जन-जागरूकता बढ़ाने हेतु किया जाने वाला एक अभ्यास है, जिसका उद्देश्य भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर ढंग से तैयार रहना है।