
चम्पावत: नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक ने 16 और 17 मार्च को चम्पावत जनपद का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने नाबार्ड द्वारा समर्थित विभिन्न विकास परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की।
अपने दौरे के दौरान, मुख्य महाप्रबंधक ने संबंधित विभागों के अधिकारियों, वैज्ञानिकों और लाभार्थियों से बातचीत की। उन्होंने परियोजनाओं की प्रगति, उनके प्रभाव और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन का आकलन किया।
मुख्य महाप्रबंधक ने भ्रमण के क्रम में आईसीएआर शीतजल मत्स्य अनुसंधान केंद्र, भीमताल का भी दौरा किया। यहां उन्होंने वैज्ञानिकों से ट्राउट मत्स्य पालन से जुड़ी तकनीकों, भविष्य की संभावनाओं और वर्तमान गतिविधियों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन को स्वरोजगार सृजन और आजीविका बढ़ाने के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में रेखांकित किया।
इसके बाद, उन्होंने ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (आरआईडीएफ) के तहत स्वीकृत एक डेयरी परियोजना का निरीक्षण किया और उसकी प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने चम्पावत स्थित आईटीआई में निर्माणाधीन कार्यशाला और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला का भी स्थलीय निरीक्षण किया। यहां उन्होंने संबंधित कार्यों को गुणवत्ता और निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश जारी किए।
मुख्य महाप्रबंधक ने एमपैक्स चम्पावत, नरियालगांव स्थित राज्य पशु प्रजनन फार्म (बद्री गाय) और लोहाघाट में स्थित लौह बर्तन विकास केंद्र का भी दौरा किया। इन स्थलों पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों और लाभार्थियों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया। इस संवाद के माध्यम से योजनाओं के प्रभाव, सामने आ रही चुनौतियों और भविष्य में किए जा सकने वाले संभावित सुधारों पर गहन चर्चा की गई।
मुख्य महाप्रबंधक ने इस बात पर जोर दिया कि नाबार्ड द्वारा संचालित विभिन्न योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसरों को बढ़ाने और आधारभूत संरचना के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।