
चंपावत: उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। इसी क्रम में चंपावत जनपद के विकासखंड बाराकोट निवासी कल्पना अधिकारी ने स्वरोजगार के माध्यम से अपनी पहचान बनाई है।
कल्पना अधिकारी ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से सिलाई का काम सीखना शुरू किया। इस कार्य में उन्हें परिवार का पूरा सहयोग मिला। इसके उपरांत, उन्होंने अपने गाँव में एक सिलाई केंद्र स्थापित किया। इस पहल से उन्होंने न केवल स्वयं को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि गाँव की अन्य महिलाओं के लिए भी आजीविका का एक नया विकल्प प्रस्तुत किया।
कल्पना अधिकारी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के अंतर्गत गठित शिव स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। वह लड़ीधुरा विकास संकुल संघ से भी जुड़ी हुई हैं। उनके इस उद्यम को ग्रामोत्थान परियोजना से भी सहायता प्राप्त हुई। यह परियोजना अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) और केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित है, जिसका संचालन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है।
ग्रामोत्थान परियोजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को स्वरोजगार की गतिविधियों से जोड़ना, ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन को कम करना और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाना है। इसी परियोजना के सहयोग से कल्पना अधिकारी को उद्यम स्थापना योजना के विषय में जानकारी मिली। निर्धारित मानकों के अनुसार, उन्हें सिलाई केंद्र स्थापित करने के लिए कुल ₹1,00,000 का आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ। इस सहयोग में ₹30,000 की अनुदान राशि, ₹50,000 का बैंक ऋण (जो परियोजना के माध्यम से सुलभ हुआ) और ₹20,000 का उनका स्वयं का अंशदान शामिल था।
प्रारंभिक चुनौतियों के बावजूद, कल्पना अधिकारी ने अपने कार्य को जारी रखा। वर्तमान में उनका सिलाई केंद्र गाँव में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहा है। आसपास के गाँवों से भी महिलाएं कपड़े सिलवाने के लिए उनके केंद्र पर आती हैं। अपने घरेलू कार्यों से समय निकालकर, कल्पना अधिकारी इस स्वरोजगार से प्रतिमाह ₹5,000 से ₹6,000 की आय अर्जित कर रही हैं, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।