
बागेश्वर। जिले में आम जनमानस को शुद्ध और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन अब बड़े कदम उठाने जा रहा है। जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे ने कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्तरीय खाद्य सुरक्षा सलाहकार समिति की बैठक में सख्त तेवर अपनाते हुए स्पष्ट किया कि मिलावटखोरी और लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक के दौरान खाद्य नमूनों (सैंपलिंग) के निर्धारित लक्ष्य पूरे न होने पर गहरी नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी ने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों (FSO) को अल्टीमेटम दिया है कि यदि कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ और दैनिक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई, तो संबंधित अधिकारियों का वेतन रोक दिया जाएगा। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु बच्चों का पोषण, स्ट्रीट फूड की गुणवत्ता और जिले को ऑर्गेनिक हब के रूप में विकसित करना रहा।
निरीक्षण और रिपोर्टिंग की नई व्यवस्था
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने पाया कि वर्तमान में खाद्य पदार्थों के नमूने लेने की गति तय मानकों से काफी कम है। इस पर अंकुश लगाने के लिए अब एक नई कार्ययोजना लागू की गई है। अब खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को केवल औचक निरीक्षण ही नहीं करना होगा, बल्कि हर कार्रवाई की ‘जियोटैग्ड’ फोटो के साथ दैनिक रिपोर्ट शासन और प्रशासन को भेजनी होगी। यह कदम पारदर्शिता सुनिश्चित करने और फील्ड वर्क की सत्यता जांचने के लिए उठाया गया है। जिलाधिकारी ने सख्त निर्देश दिए कि सैंपलिंग की प्रक्रिया में विविधता लाई जाए, ताकि केवल चुनिंदा दुकानों तक ही जांच सीमित न रहे, बल्कि घरों में इस्तेमाल होने वाले आम उत्पादों तक भी प्रशासन की पहुंच हो।
मिड-डे मील और आंगनबाड़ी केंद्रों पर विशेष नजर
बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े संवेदनशील मुद्दे पर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने निर्देशित किया कि स्कूलों में दिए जाने वाले मिड-डे मील और आंगनबाड़ी केंद्रों में वितरित होने वाली सामग्री की गुणवत्ता में कोई समझौता नहीं होगा। वहां इस्तेमाल होने वाली सब्जियों और राशन की गुणवत्ता की निगरानी अब व्हाट्सएप ग्रुप्स और जियोटैग्ड इमेज के माध्यम से की जाएगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को निर्देश दिए गए हैं कि यदि जिले में कहीं भी फूड पॉइजनिंग, संक्रमण या पीलिया का मामला सामने आता है, तो उसकी सूचना तुरंत खाद्य सुरक्षा विभाग को दी जाए ताकि स्रोत की तत्काल जांच हो सके।
स्ट्रीट फूड हब और ‘ईट राइट’ अभियान
शहर की सड़कों पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन ने ‘स्ट्रीट फूड हब’ का प्रस्ताव तैयार करने का निर्णय लिया है। इसके लिए उप जिलाधिकारी (SDM), अधिशासी अधिकारी और खाद्य सुरक्षा अधिकारी की एक संयुक्त टीम बनाई गई है, जो एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी। इसके साथ ही, ‘ईट राइट स्कूल’ अभियान का दायरा बढ़ाते हुए इसमें आश्रम पद्धति विद्यालयों को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों को बचपन से ही फोर्टिफाइड (पोषक तत्वों से भरपूर) भोजन और शुद्ध खान-पान के प्रति जागरूक करना है।
ऑर्गेनिक जिले की ओर बढ़ते कदम
बागेश्वर की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य कृषि अधिकारी (CAO) को निर्देश दिए हैं कि जिले को ‘ऑर्गेनिक जिला’ घोषित करने की संभावनाओं पर विस्तृत अध्ययन करें। एक सप्ताह के भीतर इसकी व्यवहार्यता रिपोर्ट पेश की जाएगी। इसके अलावा, उद्योग विभाग को निर्देशित किया गया है कि वे जिले में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों (फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स) की स्थापना के लिए ठोस प्रस्ताव तैयार करें, जिससे स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार और पहचान मिल सके।
जनता पर प्रभाव और जागरूकता
इस कड़े प्रशासनिक रुख का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। जब बाजार में नियमित सैंपलिंग और औचक निरीक्षण बढ़ेंगे, तो मिलावटखोरों पर लगाम लगेगी। फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों (जैसे विटामिन युक्त चावल या तेल) के प्रति जागरूकता बढ़ाने से कुपोषण जैसी समस्याओं से लड़ने में मदद मिलेगी। आम आदमी को अब यह भरोसा मिल सकेगा कि स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में उनके बच्चों को मिलने वाला भोजन सुरक्षित है। साथ ही, स्ट्रीट फूड जोन बनने से रेहड़ी-पटरी वालों को एक व्यवस्थित जगह मिलेगी और ग्राहकों को स्वच्छता के मानक के अनुरूप भोजन प्राप्त होगा।
भविष्य की रूपरेखा और निष्कर्ष
प्रशासन की इस पहल से जिले में एक ‘मल्टी-डिपार्टमेंटल’ अप्रोच देखने को मिल रही है, जहाँ पुलिस, कृषि, महिला एवं बाल विकास और चिकित्सा विभाग मिलकर काम करेंगे। यह समन्वय न केवल मिलावटखोरी रोकने में मददगार साबित होगा, बल्कि बागेश्वर को एक स्वस्थ और सुरक्षित जिले के रूप में स्थापित करेगा। निष्कर्षतः, जिलाधिकारी की यह सख्ती अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की दिशा में एक प्रभावी कदम है।