कुत्ते को बंधन में नहीं रखा तो 20 हजार का जुर्माना, नगर निगम की डॉग पॉलिसी में सख्ती

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देहरादून-शहर में पालतू कुत्तों से जुड़ी बढ़ती शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम ने डॉग पॉलिसी में सख्त प्रावधान लागू कर दिए हैं। अब यदि कोई व्यक्ति अपने पालतू कुत्ते को बिना बंधन (लीश) के सार्वजनिक स्थानों पर छोड़ता है, तो उस पर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। नगर निगम का कहना है कि यह फैसला आमजन की सुरक्षा, सार्वजनिक स्वच्छता और शहरी व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।

बीते कुछ समय से कुत्तों के काटने, आक्रामक व्यवहार और सड़कों व पार्कों में गंदगी फैलाने की शिकायतें लगातार बढ़ी थीं। कई मामलों में बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों के घायल होने की घटनाएं भी सामने आईं। इन्हीं हालात को देखते हुए नगर निगम ने डॉग पॉलिसी की समीक्षा की और इसमें आवश्यक संशोधन किए।

डॉग पॉलिसी में क्या-क्या बदला

संशोधित डॉग पॉलिसी के तहत अब हर पालतू कुत्ते का नगर निगम में पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। बिना पंजीकरण कुत्ता पालने पर भी कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। पंजीकरण के समय कुत्ते के टीकाकरण और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी देना जरूरी होगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में जिम्मेदारी तय की जा सके।

इसके साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर कुत्ते को बाहर ले जाते समय लीश में रखना अनिवार्य होगा। आक्रामक प्रवृत्ति वाले कुत्तों के लिए मज़ल (मुँह पर जाली) लगाने का भी प्रावधान किया गया है। यदि किसी कुत्ते की वजह से किसी व्यक्ति को चोट पहुंचती है, तो उसके मालिक के खिलाफ जुर्माने के साथ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

शहर में पालतू कुत्तों की स्थिति

नगर निगम के अनुमान के अनुसार शहर में 30 हजार से अधिक पालतू कुत्ते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या अब तक पंजीकृत नहीं है। इसी कारण प्रशासन को निगरानी और नियंत्रण में कठिनाई आ रही थी। नई डॉग पॉलिसी से यह उम्मीद की जा रही है कि सभी पालतू कुत्ते नगर निगम के रिकॉर्ड में आएंगे और अव्यवस्था पर रोक लगेगी।

डॉग पॉलिसी लागू करने से पहले नगर निगम को 22 आपत्तियां और सुझाव प्राप्त हुए थे। इन सभी पर विचार-विमर्श के बाद नियमों को व्यवहारिक और संतुलित बनाने का प्रयास किया गया है, ताकि जिम्मेदार कुत्ता पालकों को अनावश्यक परेशानी न हो, लेकिन लापरवाही करने वालों पर सख्ती बरती जा सके।

माइक्रोचिप और पहचान की व्यवस्था

पॉलिसी में भविष्य की योजना के तहत पालतू कुत्तों में माइक्रोचिप लगाने का भी प्रस्ताव शामिल किया गया है। माइक्रोचिप से कुत्ते के मालिक, पंजीकरण और टीकाकरण से जुड़ी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। इससे कुत्ते के गुम होने या किसी घटना के बाद जिम्मेदारी तय करना सरल होगा।

सफाई और स्वास्थ्य से जुड़ा पहलू

नगर निगम के अनुसार खुले में घूमने वाले पालतू कुत्तों से न केवल दुर्घटनाओं का खतरा रहता है, बल्कि शहर की सफाई व्यवस्था भी प्रभावित होती है। कई सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी फैलने से संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। नई डॉग पॉलिसी से स्वच्छता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी और सार्वजनिक स्थान अधिक व्यवस्थित रहेंगे।

निगरानी और अमल कैसे होगा

डॉग पॉलिसी को प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम की टीमें नियमित रूप से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में निरीक्षण करेंगी। शिकायत मिलने पर मौके पर जांच कर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि शुरुआत में लोगों को जागरूक किया जाएगा, लेकिन बार-बार नियम तोड़ने वालों पर सख्ती की जाएगी।

आम जनता को क्या फायदा होगा

इस फैसले से आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।

  • बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा बढ़ेगी

  • सड़कों और पार्कों में डर का माहौल कम होगा

  • सार्वजनिक स्थान अधिक स्वच्छ और सुरक्षित बनेंगे

  • जिम्मेदार और लापरवाह कुत्ता पालकों में स्पष्ट अंतर दिखाई देगा

नगर निगम की अपील

नगर निगम ने पालतू कुत्तों के मालिकों से अपील की है कि वे समय रहते अपने कुत्तों का पंजीकरण कराएं, नियमित टीकाकरण कराएं और सार्वजनिक स्थानों पर उन्हें हमेशा बंधन में रखें। नियमों का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि शहर को सुरक्षित, स्वच्छ और अनुशासित बनाना है।

नगर निगम का मानना है कि यदि सभी नागरिक सहयोग करें, तो जुर्माने की नौबत ही नहीं आएगी और शहर में रहने का माहौल सभी के लिए बेहतर बन सकेगा।

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