
देहरादून। बहुचर्चित अंकिता हत्याकांड को लेकर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल लगातार बनी हुई है। इस मामले में पीड़िता अंकिता के माता-पिता ने बुधवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी पीड़ा और अपेक्षाएं उनके समक्ष रखीं। मुख्यमंत्री ने परिवार को भरोसा दिलाया कि सरकार इस संवेदनशील प्रकरण को पूरी गंभीरता से ले रही है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान अंकिता के माता-पिता भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी के साथ जो हुआ, वह न केवल एक परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए पीड़ादायक है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि जब तक सच्चाई पूरी तरह सामने नहीं आती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस मामले में न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने दिया जाएगा और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार पीड़ित परिवार के साथ हर कदम पर खड़ी है और उन्हें अकेला महसूस नहीं होने दिया जाएगा।
उधर, अंकिता हत्याकांड को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने देहरादून में प्रदर्शन कर सीबीआई जांच की मांग को लेकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उनका कहना था कि इस मामले में निष्पक्ष जांच तभी संभव है, जब जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जाए।
प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच नोकझोंक की स्थिति भी देखने को मिली। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग करते हुए कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हो गई। पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया और किसी के साथ अनुचित व्यवहार नहीं किया गया।
इस बीच, पुलिस द्वारा मामले में जुटाए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए हैं और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, विपक्षी दलों का कहना है कि पुलिस जांच पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता, इसलिए सीबीआई जांच आवश्यक है।
अंकिता हत्याकांड केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह महिलाओं की सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता से भी जुड़ गया है। आम जनता में भी इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है और लोग सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक न्याय की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल, सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन और राजनीतिक दबाव के बीच सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे जांच किस दिशा में जाती है। पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। उनका स्पष्ट संदेश है कि जब तक उनकी बेटी को न्याय नहीं मिलता, तब तक वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
इस पूरे प्रकरण ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक संगठनों, महिला अधिकार समूहों और आम नागरिकों ने एक स्वर में मांग की है कि ऐसे मामलों में जांच प्रक्रिया को और अधिक सशक्त व जवाबदेह बनाया जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई होती, तो शायद यह घटना रोकी जा सकती थी। अंकिता हत्याकांड ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर केवल दावे नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।