
देहरादून: उत्तराखण्ड आबकारी मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन की एक बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
एसोसिएशन ने मांग की है कि उत्तराखण्ड अधीनस्थ आबकारी सेवा नियमावली 2015 के अनुसार, आबकारी निरीक्षक के पद पर मिनिस्ट्रीयल संवर्ग का वर्तमान 20 प्रतिशत कोटा बढ़ाकर उप आबकारी निरीक्षक के कोटे के समान 25 प्रतिशत किया जाए। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यदि मिनिस्ट्रीयल संवर्ग के पदोन्नति कोटे को किसी भी प्रकार से कम किया जाता है, तो मिनिस्ट्रीयल संवर्ग को उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
विभाग में अपर आबकारी आयुक्त तक के पद स्वीकृत हैं। इन पदों तक पहुंचने के लिए आबकारी निरीक्षक पद पर निर्धारित मापदंडों के आधार पर पदोन्नति के माध्यम से ही उप आबकारी निरीक्षक तथा लिपिक/आशुलिपिक संवर्ग के कार्मिकों को विभागीय उच्चतम पदों पर ज्येष्ठता और श्रेष्ठता के आधार पर दायित्वों का निर्वहन करने का अवसर प्राप्त हो सकता है।
एसोसिएशन ने बताया कि उप आबकारी निरीक्षक के पदों पर प्रधान आबकारी सिपाही की पदोन्नति का निर्धारित कोटा 75 प्रतिशत है। इस उच्च प्रतिशत के कारण सीधी भर्ती से चयनित उप आबकारी निरीक्षकों की संख्या काफी कम है। कुल 62 पदों में से केवल 15 पद सीधी भर्ती से भरे जाते हैं, जिससे कार्य की विश्लेषण क्षमता, प्रशिक्षण और कार्यगतिशीलता प्रभावित हो रही है।
इस स्थिति का सीधा असर राजस्व प्राप्ति और अभियोजनीय कार्यवाही में शिथिलता के रूप में देखा जा रहा है। इन गंभीर प्रभावों को देखते हुए, एसोसिएशन ने उप आबकारी निरीक्षक के सीधी भर्ती के पदों में पदोन्नति कोटे को शिथिल करने की मांग की है। इसके तहत, 75 प्रतिशत के स्थान पर इसे 50 प्रतिशत किया जाना न्यायसंगत होगा।
इसके अतिरिक्त, आबकारी विभाग के अंतर्गत मिनिस्ट्रीयल संवर्ग के 51 पदों में वृद्धि करने का प्रस्ताव रखा गया है। विभागीय राजस्व को ध्यान में रखते हुए, प्रत्येक जनपद में कम से कम दो कनिष्ठ सहायक और एक प्रधान सहायक का पद सृजित करने की मांग की गई है।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि एसोसिएशन यह मांग करे कि मिनिस्ट्रीयल संवर्ग से उप आबकारी आयुक्त (प्रशासनिक) का एक पद स्वीकृत किया जाए। इस संबंध में एक प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
आबकारी मिनिस्ट्रीयल एसोसिएशन के सभी उपस्थित सदस्यों ने सर्वसम्मति से अनिल ध्यानी को कोषाध्यक्ष का पद दिए जाने पर सहमति व्यक्त की। अनिल ध्यानी वर्तमान में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।