
नैनीताल/देहरादून-उत्तराखंड में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। कुमाऊँ और गढ़वाल के ऊँचाई वाले इलाकों में तेज बर्फबारी दर्ज की गई है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में ठंडी हवाओं और तापमान में गिरावट से जनजीवन प्रभावित हुआ है। मुक्तेश्वर, मुनस्यारी, औली, बद्रीनाथ, केदारनाथ और धनोल्टी जैसे इलाकों में लगातार बर्फ गिरने से पूरे क्षेत्र में शीतलहर का प्रभाव बढ़ गया है। मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से यह बदलाव देखने को मिला है और आने वाले कुछ दिनों तक ठंड का असर बना रह सकता है।
कुमाऊँ मंडल के पर्वतीय इलाकों में शुक्रवार रात से ही मौसम खराब होना शुरू हो गया था। मुक्तेश्वर और मुनस्यारी में सुबह तक कई इंच बर्फ जम गई, जिससे सड़कों पर फिसलन बढ़ गई। स्थानीय प्रशासन ने एहतियातन कुछ मार्गों पर वाहनों की आवाजाही सीमित कर दी है। वहीं, गढ़वाल मंडल के चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिलों में भी ऊँचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश दर्ज की गई।
बर्फबारी के चलते पहाड़ी इलाकों में तापमान शून्य से नीचे चला गया है। कई स्थानों पर पानी की पाइपलाइन जमने से पेयजल आपूर्ति प्रभावित हुई है। बिजली लाइनों पर बर्फ जमने के कारण कुछ गांवों में अस्थायी रूप से बिजली आपूर्ति बाधित हुई, हालांकि विभागों द्वारा तेजी से मरम्मत कार्य किया जा रहा है।
मैदानी क्षेत्रों की बात करें तो देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर और नैनीताल के निचले इलाकों में ठंडी हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी है। दिन का तापमान सामान्य से नीचे चला गया है और सुबह-शाम घना कोहरा भी देखने को मिला। इससे सड़क और रेल यातायात पर भी असर पड़ा है।
पर्यटन के लिहाज से देखें तो बर्फबारी ने एक ओर जहां ठंड बढ़ाई है, वहीं दूसरी ओर पर्यटन स्थलों पर रौनक भी बढ़ाई है। औली, मुनस्यारी और धनोल्टी जैसे स्थानों पर बर्फ देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। होटल और होमस्टे संचालकों के अनुसार, वीकेंड को लेकर बुकिंग में इजाफा हुआ है। हालांकि प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे मौसम की स्थिति देखकर ही यात्रा करें और आवश्यक सावधानियां बरतें।
मौसम विभाग का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से अगले 24 से 48 घंटों तक ऊँचाई वाले क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बर्फबारी जारी रह सकती है। निचले इलाकों में बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। किसानों के लिए यह मौसम दोहरा असर लेकर आया है। एक ओर ठंड से कुछ फसलों को नुकसान की आशंका है, वहीं दूसरी ओर बारिश और बर्फबारी से मिट्टी में नमी बढ़ने से रबी फसलों को लाभ भी मिल सकता है।
आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील मार्गों पर जेसीबी और स्नो-कटर तैनात किए गए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर रास्ते जल्दी खोले जा सकें। स्वास्थ्य विभाग ने भी ठंड से बचाव को लेकर सलाह जारी की है, खासकर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों के लिए।
आम लोगों के लिए यह मौसम बदलाव क्या मायने रखता है? सबसे बड़ा असर दैनिक जीवन पर पड़ता है—यातायात में देरी, ठंड से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और पहाड़ी क्षेत्रों में जरूरी सेवाओं पर दबाव। साथ ही, प्रशासन और नागरिकों दोनों के लिए यह समय सतर्क रहने का है ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड में बदले मौसम ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि पहाड़ी राज्य में मौसम कितनी तेजी से करवट ले सकता है। आने वाले दिनों में मौसम की हर अपडेट पर नजर रखना और सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करना आम जनता के लिए बेहद जरूरी होगा।