इंदौर की घटना से सबक: उत्तराखंड में सभी पेयजल लाइनों का होगा ऑडिट

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देहरादून-उत्तराखंड में पेयजल व्यवस्था को लेकर सरकार ने बड़ा और अहम फैसला लिया है। राज्य में हाल ही में इंदौर में हुई गंभीर घटना के बाद अब उत्तराखंड शासन भी पूरी तरह सतर्क हो गया है। इसी क्रम में प्रदेश की सभी पेयजल लाइनों का व्यापक ऑडिट कराए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसका उद्देश्य राज्य के हर क्षेत्र में सुरक्षित, स्वच्छ और निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

राज्य सरकार के निर्देश पर जल संस्थान और पेयजल निगम को इस कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पेयजल सचिव के अनुसार, प्रदेश में कई स्थानों पर पुरानी और जर्जर पेयजल पाइपलाइनें अभी भी उपयोग में हैं, जो भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती हैं। ऐसे में समय रहते इनकी पहचान कर आवश्यक सुधार कार्य करना बेहद जरूरी हो गया है।

पुरानी और जर्जर लाइनों पर रहेगा विशेष फोकस

ऑडिट के दौरान उन पेयजल लाइनों की विशेष जांच की जाएगी जो कई वर्षों पुरानी हो चुकी हैं या जिनकी स्थिति खराब पाई गई है। इसके साथ ही उन क्षेत्रों को भी चिन्हित किया जाएगा जहां पेयजल लाइनों के पास सीवर लाइनें या नालियां मौजूद हैं, जिससे पानी के दूषित होने की आशंका बनी रहती है।

सरकार का स्पष्ट कहना है कि जहां भी पेयजल आपूर्ति में लापरवाही या तकनीकी खामी सामने आएगी, वहां तुरंत सुधार कार्य कराया जाएगा। जरूरत पड़ने पर पुरानी पाइपलाइनों को पूरी तरह बदलने का निर्णय भी लिया जा सकता है।

शहरी क्षेत्रों में भी होगी गहन जांच

प्रदेश के शहरी इलाकों में तेजी से बढ़ती आबादी के कारण पेयजल व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव है। कई स्थानों पर क्षमता से अधिक जलापूर्ति की जा रही है, जिससे पाइपलाइन फटने या लीकेज की शिकायतें सामने आती रहती हैं। ऑडिट के दौरान इन बिंदुओं को भी गंभीरता से जांचा जाएगा।

इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि कहीं पेयजल लाइनों के ऊपर भारी निर्माण कार्य या सड़क चौड़ीकरण के चलते नुकसान तो नहीं हो रहा है। ऐसे मामलों में संबंधित विभागों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

तकनीकी जांच और सैंपल टेस्टिंग भी होगी

ऑडिट केवल कागजी नहीं रहेगा, बल्कि मौके पर जाकर तकनीकी जांच की जाएगी। पानी के सैंपल लेकर उसकी गुणवत्ता की भी जांच कराई जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लोगों को मिलने वाला पानी स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है।

पेयजल सचिव ने कहा कि यदि कहीं भी मानकों के अनुरूप जल आपूर्ति नहीं पाई जाती है, तो संबंधित एजेंसी या ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जनस्वास्थ्य को लेकर सरकार गंभीर

राज्य सरकार का मानना है कि पेयजल व्यवस्था सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य से जुड़ा विषय है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

सरकार के इस फैसले से आम लोगों को सुरक्षित पेयजल मिलने की उम्मीद बढ़ी है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि समय-समय पर पेयजल लाइनों का ऑडिट होना बेहद आवश्यक है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को पहले ही टाला जा सके।

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