अल्मोड़ा: काचुला में अपर सचिव प्रकाश चंद्र की चौपाल, ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर किया निस्तारण

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अल्मोड़ा। उत्तराखंड शासन के अपर सचिव समाज कल्याण और बहुउद्देशीय वित्त विकास निगम के प्रबंध निदेशक प्रकाश चंद्र ने विकासखंड भैंसियाछाना के ग्राम पंचायत काचुला का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों के साथ खुली चौपाल लगाकर जनसंवाद किया और सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की धरातलीय स्थिति का जायजा लिया। चौपाल में ग्रामीणों ने विकास कार्यों पर संतोष व्यक्त किया, साथ ही डिजिटल लाइब्रेरी, खेल मैदान और सड़कों जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की मांग भी प्रमुखता से उठाई। अपर सचिव ने इन समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए इन्हें शासन स्तर पर प्राथमिकता से रखने का भरोसा दिलाया।


विकास की हकीकत जानने धरातल पर उतरे अधिकारी

काचुला ग्राम पंचायत में आयोजित इस विशेष चौपाल का मुख्य उद्देश्य शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँचाना था। अपर सचिव प्रकाश चंद्र ने स्वयं गांव की गलियों और विकास कार्यों का स्थलीय सत्यापन किया। उन्होंने ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए पूछा कि क्या उन्हें पेंशन, राशन और अन्य सुविधाओं का लाभ समय पर मिल रहा है या नहीं। ग्रामीणों ने बताया कि पेयजल, स्वच्छता और विद्युत जैसी बुनियादी सुविधाएं गांव में बेहतर स्थिति में हैं, लेकिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कुछ नए कार्यों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

निरीक्षण के दौरान प्रकाश चंद्र ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्राम स्तर पर जो भी फाइलें लंबित हैं, उनका निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा है कि ग्रामीणों को अपने छोटे-छोटे कार्यों के लिए जिला मुख्यालय या राजधानी के चक्कर न लगाने पड़ें।

शिक्षा से लेकर बुनियादी ढांचे तक: ग्रामीणों ने रखी अपनी मांगें

चौपाल में गांव के युवाओं और बुजुर्गों ने अपनी समस्याओं को विस्तार से रखा। काचुला के ग्रामीणों ने क्षेत्र में एक खेल मैदान की कमी का मुद्दा उठाया, ताकि स्थानीय युवा खेलकूद की गतिविधियों से जुड़ सकें। इसके साथ ही, वर्तमान डिजिटल युग को देखते हुए गांव में एक डिजिटल लाइब्रेरी और कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) खोलने की भी मांग की गई।

सड़क मार्ग की कनेक्टिविटी को और सुदृढ़ करने के साथ-साथ ग्रामीणों ने गांव में बारात घर और सामुदायिक भवन के निर्माण का प्रस्ताव भी रखा। इसके अतिरिक्त, कृषि प्रधान क्षेत्र होने के नाते चाय नर्सरी और खेती से जुड़ी आधुनिक सुविधाओं की उपलब्धता पर भी चर्चा की गई। अपर सचिव ने इन सभी मांगों को गंभीरता से सुना और आश्वस्त किया कि इन विकास कार्यों के लिए जल्द ही शासन स्तर से आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

पेंशन और स्वरोजगार पर विशेष जोर

अपर सचिव ने समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित विभिन्न पेंशन योजनाओं, जैसे वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने पात्र व्यक्तियों से आग्रह किया कि यदि कोई भी व्यक्ति इन योजनाओं से छूट गया है, तो तत्काल सहायक समाज कल्याण अधिकारी से संपर्क कर अपना पंजीकरण कराएं।

स्वरोजगार की दिशा में उन्होंने ‘होमस्टे’ योजना पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि काचुला जैसे प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर क्षेत्रों में होमस्टे पर्यटन आय का एक बड़ा जरिया बन सकता है। इसके साथ ही जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए घेराबंदी, परंपरागत खेती को प्रोत्साहन, चारागाह विकास और सिंचाई संसाधनों के आधुनिकीकरण पर भी विशेषज्ञों के माध्यम से ग्रामीणों का मार्गदर्शन किया गया।

प्रशासनिक अमले की उपस्थिति और जनसंवाद

कार्यक्रम में शासन और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की बड़ी टीम मौजूद रही। इसमें ग्राम प्रधान काचुला, पूर्व ग्राम प्रधान, खंड विकास अधिकारी, नायब तहसीलदार, सहायक खंड विकास अधिकारी और सहायक समाज कल्याण अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के कार्मिक शामिल थे। अधिकारियों ने मौके पर ही कई शिकायतों का संज्ञान लिया और उनके निस्तारण की समयसीमा तय की।

आम आदमी पर प्रभाव और आगे की राह

इस तरह की चौपालों का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि शासन और जनता के बीच की दूरी कम होती है। काचुला के ग्रामीणों के लिए यह एक बड़ा अवसर था जहाँ एक उच्च स्तरीय अधिकारी उनके द्वार पर मौजूद थे।

आम नागरिक को क्या मिलेगा फायदा?

  • सीधा संवाद: बिचौलियों के बिना ग्रामीण अपनी बात सीधे प्रबंध निदेशक स्तर के अधिकारी तक पहुँचा पाए।

  • योजनाओं की स्पष्टता: समाज कल्याण और कृषि योजनाओं की बारीकियों को समझने का मौका मिला।

  • त्वरित कार्यवाही: खेल मैदान और लाइब्रेरी जैसे प्रस्तावों को अब शासन स्तर पर सीधा समर्थन मिलने की उम्मीद है।

  • विवादों का अंत: भूमि संबंधी छोटे-मोटे विवादों के निपटारे के लिए राजस्व विभाग को मौके पर ही सक्रिय किया गया।

निष्कर्ष: जनहित की दिशा में एक सकारात्मक कदम

काचुला में आयोजित यह चौपाल केवल एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि यह जवाबदेह प्रशासन का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश करती है। जब उच्चाधिकारी स्वयं दुर्गम क्षेत्रों का दौरा करते हैं, तो न केवल विकास कार्यों में पारदर्शिता आती है, बल्कि स्थानीय जनता का तंत्र पर विश्वास भी बढ़ता है। डिजिटल लाइब्रेरी और खेल मैदान जैसी मांगें यह दर्शाती हैं कि उत्तराखंड के ग्रामीण अब केवल रोटी-कपड़ा-मकान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आधुनिक सुविधाओं के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं। शासन का यह आश्वासन यदि जल्द धरातल पर उतरता है, तो काचुला विकासखंड भैंसियाछाना के लिए एक मॉडल गांव के रूप में उभर सकता है।

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