
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ताज़ा वर्ल्ड मलेरिया रिपोर्ट 2024 ने दुनिया को चेतावनी दी है कि मलेरिया अभी भी वैश्विक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में करीब 28.2 करोड़ लोग मलेरिया से संक्रमित हुए, जबकि 6.10 लाख से अधिक लोगों की मौत इस बीमारी के कारण हुई।
WHO ने दवा प्रतिरोध को मलेरिया उन्मूलन अभियान के लिए सबसे बड़ा उभरता खतरा बताया है। संगठन के मुताबिक, कई देशों में आर्टेमिसिनिन आधारित संयोजन दवाओं की प्रभावशीलता घटने के संकेत मिले हैं, जिससे इलाज की सफलता पर असर पड़ रहा है।
टीकाकरण से मिली बड़ी राहत
रिपोर्ट के अनुसार WHO द्वारा अनुशंसित मलेरिया टीकों ने वर्ष 2024 में 17 करोड़ संक्रमणों और लगभग 10 लाख मौतों को रोकने में मदद की। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9 लाख अधिक है, जो टीकाकरण कार्यक्रमों की बढ़ती असरकारिता को दर्शाती है।
अफ्रीका अभी भी मलेरिया से सबसे ज़्यादा प्रभावित क्षेत्र बना हुआ है। कुल मौतों का 95% हिस्सा यहीं दर्ज हुआ, और इनमें भी अधिकतर पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चे शामिल हैं।
दवा और कीटनाशक प्रतिरोध बना नई चुनौती
WHO ने बताया कि कम से कम 8 अफ्रीकी देशों में मलेरिया-रोधी दवाओं के प्रति प्रतिरोध की पुष्टि या आशंका सामने आई है।
इसके साथ ही—
मलेरिया परजीवी में pfhrp2 जीन विलोपन के चलते रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट की सटीकता कम हो रही है।
48 देशों में पायरिथ्रॉयड प्रतिरोध पाया गया, जिससे कीटनाशक-युक्त मच्छरदानियों की प्रभावशीलता प्रभावित हो रही है।
Anopheles stephensi मच्छर प्रजाति, जो कई कीटनाशकों के प्रति प्रतिरोधी है, अब 9 अफ्रीकी देशों में फैल चुकी है और शहरी मलेरिया नियंत्रण के लिए बड़ी चिंता बन गई है।
कुछ सकारात्मक उपलब्धियाँ भी
दूसरी ओर, WHO ने बताया कि अब तक 47 देशों और एक क्षेत्र को मलेरिया-मुक्त घोषित किया जा चुका है।
2024 में केप वर्डे और मिस्र को यह प्रमाणन मिला, जबकि जॉर्जिया, सूरीनाम और तिमोर-लेस्ते 2025 में इस सूची में शामिल हुए।
दुनिया का पहला मलेरिया टीका वर्ष 2021 में मंजूर हुआ था और आज 24 देश इसे अपने नियमित टीकाकरण कार्यक्रमों में शामिल कर चुके हैं।
जलवायु परिवर्तन व संघर्ष भी बढ़ा रहे जोखिम
रिपोर्ट ने बताया कि तापमान में बदलाव, अनियमित वर्षा, संघर्ष और अस्थिरता जैसी परिस्थितियाँ मलेरिया के प्रसार को तेज कर रही हैं।
पिछले एक दशक में वैश्विक फंडिंग लगभग स्थिर रहने से कई देशों के मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रमों को झटका लगा है।
WHO महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने कहा कि नई तकनीकें और टीके उम्मीद जगाते हैं, लेकिन बढ़ते मामले, बढ़ता दवा प्रतिरोध और वित्तीय कमी बीते दो दशकों की प्रगति को उलट सकते हैं। उन्होंने कहा कि “चुनौतियाँ गंभीर हैं, लेकिन असंभव नहीं—यदि प्रभावित देश मजबूत नेतृत्व और लक्षित निवेश करें, तो मलेरिया-मुक्त विश्व का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।”