Indigo ने फिर पटरी पकड़ी, पर यात्रियों का भरोसा अब भी डगमगाया

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सार-इंडिगो की उड़ानें धीरे-धीरे सामान्य होती दिख रही हैं। एयरपोर्ट पर पहले जैसी अफरा-तफरी कम है और शेड्यूल भी अधिकतर स्थिर है। लेकिन इस सुधरते माहौल के बीच एक चीज अब तक पूरी तरह नहीं लौटी—यात्रियों का भरोसा।
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन, जिसे लोग सबसे विश्वसनीय मानते थे, आज अपनी छवि को फिर से मजबूत करने की चुनौती से जूझ रही है।

🛫 कैंसिलेशन और लंबी देरी की टीस अब भी बाकी

पिछले हफ्ते हुए लगातार कैंसिलेशन, घंटों की देरी, रातभर एयरपोर्ट की कुर्सियों पर बिताए पल और बच्चों का परेशान चेहरा—इन सबने यात्रियों के मन में डर की एक परत छोड़ दी है।
फ्लाइटें फिर चल रही हैं, पर टिकट बुक करने से पहले लोग अब दो बार सोच रहे हैं।

जबलपुर के लिए फ्लाइट का इंतजार कर रहे यात्री सचिन बताते हैं:
“विश्वास अब भी वहीं नहीं है। आज की फ्लाइट फिर लेट है, लेकिन स्टाफ का कहना है कि स्थिति पहले से बेहतर है, इसलिए ज्यादा देरी नहीं होगी।”

😟 “अब टिकट लेते डर लगता है”

दिल्ली में नौकरी करने वाली स्नेहा कहती हैं कि पहले रांची जाने के लिए वह हमेशा इंडिगो को चुनती थीं, लेकिन हालिया अनुभव ने सोच बदल दी।
उनकी दिल्ली फ्लाइट डिले हुई और बाद में कैंसल हो गई—48 घंटे बीतने के बाद भी रिफंड नहीं मिला।

स्नेहा कहती हैं:
“अब टिकट लेते डर लगता है कि कहीं फिर 4–5 घंटे का इंतजार न मिल जाए। मीटिंग मिस हो जाए तो नुकसान हमारा होता है, एयरलाइन का नहीं।”

💼 व्यापार यात्रियों का भरोसा भी हिला

रांची के सेम बासु, जो स्टील कारोबारी हैं, बताते हैं:
उन्होंने 2 दिसंबर की दिल्ली फ्लाइट बुक की थी, जो उड़ान भरने से एक दिन पहले ही कैंसल हो गई। दोबारा टिकट लिया तो एकतरफा किराया 48 हजार रुपये पड़ा।

“हम अक्सर दिल्ली आते-जाते हैं, लेकिन अब इंडिगो को सिर्फ विकल्प के रूप में ही रखूंगा। ऑफिस ट्रैवल टीम भी कह रही है कि फिलहाल इंडिगो से दूरी रखो।”

✔️ निष्कर्ष

हालात भले पटरी पर लौटते दिख रहे हों, लेकिन इंडिगो के सामने बड़ी चुनौती है—यात्रियों का टूटा भरोसा वापस पाना।
फ्लाइटें समय से चलें, रिफंड प्रक्रिया तेज हो, और यात्रियों को स्पष्ट जानकारी मिले—तभी एयरलाइन अपनी पुरानी विश्वसनीयता वापस हासिल कर पाएगी।

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