
चंपावत: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जनपद में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। इसी क्रम में, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की एक बैठक आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी मनीष कुमार ने की।
बैठक के दौरान, सिंचाई विभाग की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट पर विस्तृत चर्चा हुई। यह चर्चा टनकपुर और अमोड़ी क्षेत्रों में नदी के कटाव और जलभराव की समस्या से संबंधित थी।
जिलाधिकारी ने कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। उन्होंने शारदा नदी के गैण्डाखाली संख्या-03, किरोड़ा नाला (जो राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित पुल के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में है) तथा अमोड़ी एवं नौलापानी क्षेत्रों में मानसून से पहले संभावित खतरों को देखते हुए नदी में खुदाई (ट्रेंचिंग) और चैनलाइजेशन कार्य तत्काल शुरू करने का आदेश दिया।
बैठक में जिलाधिकारी ने कई संवेदनशील क्षेत्रों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि गैण्डाखाली संख्या-03 और खेतखेड़ा में शारदा नदी का रिवर बेड (नदी तल) उपखनिजों के उचित चुगान के अभाव में ऊपर उठ गया है। इसके परिणामस्वरूप, लगभग 25-25 परिवारों की कृषि भूमि और आवासीय क्षेत्र नदी के कटाव के गंभीर खतरे का सामना कर रहे हैं।
इसी तरह, बिलौना-बेलखेत क्षेत्र में लधिया नदी का तल भी ऊँचा हो गया है, जिससे बिलौना, देवखोला और उतरैना गांवों के लगभग 50 परिवार जोखिम में पड़ गए हैं।
अमोड़ी क्षेत्र में क्वैराला नदी के कारण लगभग 19 परिवारों और एक राजकीय महाविद्यालय पर संभावित खतरा बना हुआ है। इसके अतिरिक्त, किरोड़ा नाला में मलबा जमा होने से लगातार जलभराव की स्थिति पैदा हो रही है, जिससे टनकपुर क्षेत्र के आगबाग, नायकगोठ और बोरागोठ समेत कई गांव प्रभावित हो रहे हैं।
हेलागोठ क्षेत्र में भी जल निकासी और कटाव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए चैनलाइजेशन कार्य करवाने के निर्देश जारी किए गए।
शारदा रिवर फ्रंट परियोजना के तहत ‘नायकगोठ क्षेत्र में आपदा सहनशीलता हेतु पारिस्थितिकी कॉरिडोर विकास’ कार्यों पर भी चर्चा हुई। इस परियोजना में (जो पहले किरोड़ा नाला से रिवर फ्रंट तक सड़क निर्माण और भूमि पुनःप्राप्ति के रूप में जानी जाती थी) गैबियन वॉल और रिटेनिंग वॉल के निर्माण में संभावित दोहराव के एक मामले को गंभीरता से लिया गया। इस मामले की स्थलीय जांच के लिए गठित समिति ने 06 अप्रैल 2026 को निरीक्षण किया और उन्हें विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानसून शुरू होने से पहले सभी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए, नदी कटाव और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए, और संवेदनशील क्षेत्रों में सार्वजनिक सुरक्षा को सर्वोच्च महत्व दिया जाए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि किए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।
इस बैठक में उपजिलाधिकारी अनुराग आर्या, पुलिस उपाधीक्षक वंदना वर्मा, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल और अवर अभियंता सिंचाई मनोज तिवारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।