
चम्पावत: जनपद में पेयजल आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने तथा स्थानीय निवासियों की समस्याओं के समाधान के लिए जिलाधिकारी मनीष कुमार ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के अनुपालन में जल संस्थान और जल निगम ने विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त शिकायतों पर त्वरित और प्रभावी कार्यवाही प्रारंभ कर दी है। जिलाधिकारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा की उपलब्धता में किसी भी प्रकार की लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
छमनिया क्षेत्र में हैंडपंप की आयरन रिमूवल किट में खराबी की शिकायत दर्ज की गई थी। इस संबंध में, जल संस्थान के अधिशाषी अभियंता ने जानकारी दी है कि देहरादून की एक अनुबंधित फर्म द्वारा मरम्मत का कार्य 12 मार्च 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पाटन पाटनी क्षेत्र में पेयजल समस्या के समाधान हेतु आवश्यक सामग्री उपलब्ध हो चुकी है, और यहाँ का कार्य 17 मार्च 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
धूरा ग्राम पंचायत में पेयजल संकट को देखते हुए, विभाग द्वारा त्वरित राहत प्रदान करते हुए टैंकरों के माध्यम से जल आपूर्ति आरंभ कर दी गई है। जल निगम के अभियंताओं ने बताया है कि इस क्षेत्र में पूर्व स्थापित नलकूप में वर्षा की कमी के कारण जल स्तर में गिरावट आई है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए, धूरा क्षेत्र से नीचे उपलब्ध एक अन्य स्रोत से नई पेयजल योजना का प्राक्कलन तैयार किया जा रहा है। इस योजना के श्राव मापन का कार्य ग्रीष्म ऋतु में किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, दो नए हैंडपंपों की स्थापना हेतु स्थलों का चयन किया जा रहा है, और चौड़ाकोट हैंडपंप को सौर ऊर्जा आधारित बनाने की मांग पर भी विचार किया जा रहा है।
पूर्णागिरी क्षेत्र में जल संयोजन में उत्पन्न बाधा को दूर करने के उद्देश्य से एक तकनीकी टीम को भेजा गया है। इसके अलावा, धूरा में लगभग एक सप्ताह पूर्व मरम्मत किए गए एक हैंडपंप की भी जांच की गई है, जो वर्तमान में संतोषजनक ढंग से कार्य कर रहा है।
राईकोट महर योजना के संदर्भ में जानकारी दी गई है कि इसकी वितरण प्रणाली का कार्य संपन्न हो चुका है। जल जीवन मिशन के तहत शेष बचे कार्यों को बजट की उपलब्धता के आधार पर शीघ्रता से पूरा कर संबंधित शिकायत का निवारण किया जाएगा। इसी क्रम में, ग्रान बगेडी धौन में स्थित धार्मिक स्थलों पर पेयजल आपूर्ति का कार्य अगले 20 दिनों के भीतर पूर्ण करने के लिए संबंधित ठेकेदार को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निर्धारित समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आगामी ग्रीष्मकाल में स्थानीय निवासियों को पेयजल संबंधी समस्याओं का सामना न करना पड़े।