
देहरादून। उत्तराखंड में राज्य खाद्य योजना के दायरे में आने वाले लाखों परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। प्रदेश के लगभग साढ़े नौ लाख राशन कार्ड धारकों को इस महीने से सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर पांच किलो गेहूं मिलना शुरू हो जाएगा। लंबे समय से गेहूं की कमी के चलते इन परिवारों को गेहूं के बदले केवल चावल दिया जा रहा था, लेकिन अब खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने पुरानी व्यवस्था को बहाल कर दिया है। इस फैसले से उन मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जो केवल चावल मिलने के कारण बाजार से महंगे दामों पर गेहूं खरीदने को मजबूर थे।
व्यवस्था में बदलाव की पृष्ठभूमि और पुराना संकट
उत्तराखंड में राशन वितरण प्रणाली के तहत दो मुख्य श्रेणियां प्रभावी हैं—एक केंद्र सरकार की योजना (NFSA) और दूसरी राज्य सरकार की अपनी ‘राज्य खाद्य योजना’। राज्य खाद्य योजना के तहत आने वाले परिवारों को प्रति राशन कार्ड कुल साढ़े सात किलो अनाज देने का प्रावधान है। नियम के अनुसार, इसमें पांच किलो गेहूं और ढाई किलो चावल दिया जाना चाहिए।
हालांकि, पिछले लगभग चार वर्षों से स्थितियां सामान्य नहीं थीं। भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य के गोदामों में गेहूं के स्टॉक की कमी के कारण विभाग ने गेहूं का वितरण बंद कर दिया था। इसकी भरपाई के लिए लाभार्थियों को गेहूं के हिस्से का भी चावल ही दिया जा रहा था। यानी, परिवार को मिलने वाला पूरा साढ़े सात किलो राशन चावल के रूप में मिल रहा था। पहाड़ी राज्य होने के कारण यहाँ के खान-पान में गेहूं की महत्ता अधिक है, ऐसे में राशन कार्ड धारक लगातार गेहूं की मांग कर रहे थे।
खाद्य विभाग का नया आदेश और वर्तमान स्थिति
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अपर निदेशक पीएस पांगती ने स्पष्ट किया है कि अब गेहूं की उपलब्धता पर्याप्त है। इसी को देखते हुए विभाग ने निर्णय लिया है कि जनवरी 2026 से ही सभी पात्र परिवारों को उनके कोटे का पूरा पांच किलो गेहूं उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही ढाई किलो चावल की व्यवस्था भी यथावत रहेगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव केवल राज्य खाद्य योजना के कार्ड धारकों के लिए है, अन्य श्रेणियों (जैसे अंत्योदय) की व्यवस्थाओं में कोई बड़ा फेरबदल नहीं किया गया है।
जिलों में राशन देरी का कारण और समाधान
इस महीने प्रदेश के कई हिस्सों, विशेषकर कुमाऊं और गढ़वाल के दूरस्थ जिलों में राशन पहुंचने में देरी की खबरें भी सामने आई थीं। राशन की दुकानों पर समय से अनाज न पहुंचने के कारण कार्ड धारकों को चक्कर काटने पड़ रहे थे। इस पर विभाग ने स्पष्टीकरण दिया है कि फोर्टिफाइड चावल (पोषक तत्वों से भरपूर चावल) के उठाव और उसकी नई वितरण प्रक्रिया के कारण कुछ तकनीकी विलंब हुआ था। अब विभाग ने दावा किया है कि बुधवार तक प्रदेश के शत-प्रतिशत जिलों में राशन की खेप पहुंच चुकी है और वितरण का कार्य सुचारू रूप से शुरू कर दिया गया है।
आम जनता पर प्रभाव और खान-पान में बदलाव
इस फैसले का सीधा असर उत्तराखंड के उन साढ़े नौ लाख परिवारों की रसोई पर पड़ेगा जो सीधे तौर पर राज्य खाद्य योजना से जुड़े हैं। उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में रोटी मुख्य आहार का हिस्सा है। पिछले चार सालों से राशन में गेहूं न मिलने के कारण गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को खुले बाजार से 30 से 40 रुपये प्रति किलो की दर से गेहूं या आटा खरीदना पड़ रहा था। सरकारी दुकान से 5 किलो गेहूं मिलने से अब इन परिवारों के मासिक बजट में बचत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल चावल का सेवन करने से आहार में असंतुलन पैदा हो रहा था। गेहूं मिलने से अब लाभार्थियों को पर्याप्त कार्बोहाइड्रेट और फाइबर मिल सकेगा, जो स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी बेहतर है।
भविष्य की रणनीति और आपूर्ति श्रृंखला
सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में गेहूं की आपूर्ति में फिर से ऐसी कमी न आए। इसके लिए बफर स्टॉक प्रबंधन पर ध्यान दिया जा रहा है। खाद्य विभाग अब डिजिटल माध्यमों से राशन की ट्रैकिंग कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि गोदाम से निकला गेहूं सीधे पात्र व्यक्ति तक ही पहुंचे। आने वाले समय में फोर्टिफाइड अनाज के वितरण को और अधिक पारदर्शी बनाने की भी योजना है, ताकि कुपोषण जैसी समस्याओं से लड़ा जा सके।
निष्कर्ष: जनहित में एक सराहनीय कदम
राज्य खाद्य योजना के तहत गेहूं की वापसी केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है, बल्कि यह आम आदमी की बुनियादी जरूरत से जुड़ा फैसला है। सरकार द्वारा चार साल बाद इस व्यवस्था को फिर से लागू करना यह दर्शाता है कि आपूर्ति श्रृंखला अब पटरी पर लौट आई है। हालांकि, विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि राशन की गुणवत्ता मानक के अनुरूप हो और दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में वितरण के दौरान किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या देरी न हो। राशन कार्ड धारकों के लिए यह महीना एक बड़ी राहत लेकर आया है, जिससे उनकी रसोई का स्वाद और बजट दोनों बेहतर होंगे।