संपादकीय: GST के 9 वर्ष—’एक देश, एक कर’ का सपना कितना हुआ साकार?

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1 जुलाई भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक तारीख है। इसी दिन वर्ष 2017 में देशभर में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया गया था। इसका उद्देश्य था पूरे देश में ‘एक देश, एक कर’ की व्यवस्था लागू कर कर प्रणाली को सरल, पारदर्शी और व्यापार-अनुकूल बनाना। आज GST को लागू हुए 9 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस दौरान इस व्यवस्था ने भारतीय अर्थव्यवस्था में कई बड़े बदलाव किए हैं, लेकिन कुछ चुनौतियां अब भी बरकरार हैं।

GST लागू होने से पहले देश में 17 प्रमुख अप्रत्यक्ष कर और 13 प्रकार के सेस अलग-अलग स्तर पर लागू थे। अलग-अलग राज्यों में अलग कर व्यवस्था होने के कारण व्यापारियों को कई प्रकार की जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था। GST ने इन करों को काफी हद तक एकीकृत कर पूरे देश को एक साझा बाजार में बदलने का प्रयास किया।

इन नौ वर्षों में GST व्यवस्था का दायरा लगातार बढ़ा है। आज देश में 1.5 करोड़ से अधिक पंजीकृत GST करदाता हैं। वहीं वित्त वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड ₹22.08 लाख करोड़ का GST संग्रह दर्ज किया गया, जो इस व्यवस्था की बढ़ती स्वीकार्यता और कर अनुपालन को दर्शाता है। इसके अलावा जून 2026 में GST संग्रह ₹1,94,812 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 13.9 प्रतिशत अधिक है। यह संकेत देता है कि देश की आर्थिक गतिविधियां और कर संग्रह दोनों मजबूत हो रहे हैं।

GST का सबसे बड़ा लाभ यह रहा कि टैक्स पर टैक्स (Cascading Effect) की समस्या काफी हद तक समाप्त हुई। इनपुट टैक्स क्रेडिट की व्यवस्था से उद्योगों और व्यापारियों को राहत मिली। राज्यों के बीच माल की आवाजाही आसान हुई, ट्रकों का समय बचा और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आई। ई-वे बिल, ई-इनवॉइस और डिजिटल रिटर्न जैसी व्यवस्थाओं ने कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया।

हालांकि दूसरी ओर छोटे व्यापारियों और सूक्ष्म उद्योगों के लिए GST का अनुपालन शुरुआती वर्षों में आसान नहीं रहा। बार-बार नियमों में बदलाव, ऑनलाइन रिटर्न की प्रक्रिया और तकनीकी जटिलताओं ने छोटे कारोबारियों की चुनौतियां बढ़ाईं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रणाली पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है, लेकिन इसे और सरल बनाने की आवश्यकता अब भी बनी हुई है।

GST व्यवस्था की एक बड़ी सीमा यह भी है कि पेट्रोल, डीजल, प्राकृतिक गैस और मानव उपभोग के लिए शराब अभी भी इसके दायरे से बाहर हैं। इससे पूरे देश में पूरी तरह समान अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था का उद्देश्य अभी अधूरा माना जाता है। साथ ही, कई वस्तुओं पर अलग-अलग कर स्लैब होने के कारण उद्योग जगत लंबे समय से कर दरों के और अधिक सरलीकरण की मांग करता रहा है।

आम उपभोक्ताओं के लिए भी GST का प्रभाव मिला-जुला रहा है। कई वस्तुओं और सेवाओं पर कर व्यवस्था पारदर्शी हुई है, जबकि कुछ क्षेत्रों में कर दरों और अनुपालन लागत का असर कीमतों पर भी देखने को मिला। समय-समय पर GST परिषद विभिन्न वस्तुओं की कर दरों की समीक्षा कर राहत देने का प्रयास करती रही है।

निष्कर्ष यह है कि GST भारतीय कर प्रणाली में अब तक का सबसे बड़ा सुधार माना जा सकता है। इसने देश को एकीकृत बाजार देने, कर संग्रह बढ़ाने और डिजिटल कर प्रशासन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं छोटे व्यापारियों के लिए अनुपालन को और सरल बनाना, कर स्लैब का युक्तिकरण करना तथा पेट्रोलियम उत्पादों जैसे क्षेत्रों को भविष्य में GST के दायरे में लाने पर गंभीरता से विचार करना होगा। यदि इन सुधारों पर निरंतर काम होता रहा, तो आने वाले वर्षों में GST भारतीय अर्थव्यवस्था को और अधिक प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।