
अल्मोड़ा-रानीधारा और जाखनदेवी क्षेत्र में तेंदुए की बढ़ती सक्रियता ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बीते दिनों शाम और रात के समय रिहायशी इलाके में तेंदुए की चहलकदमी CCTV कैमरे में कैद हुई, जिसके बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया। वीडियो सामने आने के बाद लोगों में भय के साथ-साथ सतर्कता भी बढ़ गई है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, पिछले कुछ समय से शाम ढलते ही तेंदुए के दिखाई देने की सूचनाएं मिल रही थीं, लेकिन अब CCTV फुटेज सामने आने से इन आशंकाओं की पुष्टि हो गई है। वीडियो में तेंदुआ सड़क पर निडर होकर घूमता हुआ दिखाई दे रहा है, जिससे यह साफ हो गया है कि वह आबादी वाले क्षेत्र में सक्रिय है। खास बात यह है कि यह इलाका पूरी तरह रिहायशी है और आसपास मंदिर, दुकानें तथा घर स्थित हैं।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि शाम के समय आवाजाही के दौरान अब डर का माहौल रहता है। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं विशेष रूप से भयभीत हैं। कई लोगों ने सूर्यास्त के बाद घर से बाहर निकलना कम कर दिया है। ग्रामीण और शहरी सीमावर्ती इलाकों में तेंदुए की बढ़ती गतिविधि ने आमजन की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निगरानी तेज कर दी है। विभाग की टीम लगातार गश्त कर रही है और तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में कैमरा ट्रैप लगाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है, ताकि तेंदुए की मूवमेंट का सही पैटर्न समझा जा सके और समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
वन विभाग ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से रात के समय बाहर न निकलें। अकेले चलने से बचें और बच्चों को विशेष रूप से सतर्क रखें। साथ ही, खुले में कूड़ा न फेंकने, पालतू जानवरों को सुरक्षित स्थान पर रखने और झाड़ियों वाले क्षेत्रों में न जाने की सलाह दी गई है। विभाग का मानना है कि मानवीय लापरवाही भी कई बार जंगली जानवरों को रिहायशी इलाकों की ओर आकर्षित करती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों के आसपास बढ़ती आबादी और प्राकृतिक आवास में कमी के कारण तेंदुए जैसे वन्य जीव भोजन और सुरक्षित मार्ग की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ रहे हैं। यह समस्या केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि कई पहाड़ी और मैदानी इलाकों में देखी जा रही है।
स्थानीय प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। जरूरत पड़ने पर क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम और चेतावनी बोर्ड लगाए जा सकते हैं। ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए मुनादी और सूचना प्रसार की व्यवस्था भी की जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
इसके अलावा स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में रात के समय पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था की जाए और संवेदनशील मार्गों पर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं। लोगों का कहना है कि अंधेरे के कारण तेंदुए की मौजूदगी का समय रहते अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे खतरा और बढ़ जाता है। यदि प्रकाश व्यवस्था बेहतर हो और नियमित निगरानी हो, तो आमजन खुद को अधिक सुरक्षित महसूस करेगा।
वहीं वन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि तेंदुए को पकड़ने या भगाने के प्रयास में आम नागरिक स्वयं कोई जोखिम न उठाएं। किसी भी प्रकार की तेंदुए से संबंधित गतिविधि दिखने पर तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचना दें। विभाग का कहना है कि सामूहिक सतर्कता और समय पर सूचना मिलने से किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सकता है और मानव व वन्यजीव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।