राज्यसभा में गरजे मोदी: ‘रोज दो किलो गाली खाता हूँ, यही मेरी सेहत का राज’

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए कांग्रेस और विपक्षी दलों पर अब तक का सबसे कड़ा प्रहार किया है। प्रधानमंत्री ने सदन के भीतर कांग्रेस की कार्यशैली और मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस दल ने देश के राष्ट्रपति, दलितों और सिखों का बार-बार अपमान किया है, उसे ‘संविधान’ शब्द बोलने का भी नैतिक अधिकार नहीं है। प्रधानमंत्री का यह संबोधन उस समय आया जब सदन में विपक्ष द्वारा लगातार नारेबाजी और शोर-शराबा किया जा रहा था। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है, जबकि विपक्ष केवल नकारात्मकता और व्यक्तिगत हमलों में उलझा हुआ है।

अपमान की राजनीति और संविधान पर बहस

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि लोकतंत्र में पदों की गरिमा सर्वोपरि होती है। उन्होंने पूर्व की घटनाओं का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा से दलित समाज और पिछड़ों से आने वाले व्यक्तित्वों का निरादर किया है। उन्होंने विशेष रूप से राष्ट्रपति के पद का उल्लेख करते हुए कहा कि एक गरीब और आदिवासी परिवार से आने वाली महिला जब इस सर्वोच्च पद पर आसीन हुई, तो विपक्ष ने उसे स्वीकार करने के बजाय उनके सम्मान को ठेस पहुँचाने का काम किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज और उस संवैधानिक व्यवस्था का अपमान है जिसके संरक्षण का दावा विपक्ष करता है।

‘दो किलो गाली’ और सेहत का राज: तंज और सच्चाई

सदन में चर्चा के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब प्रधानमंत्री ने अपने ऊपर होने वाले व्यक्तिगत हमलों का जवाब बेहद चुटीले अंदाज में दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास उनके खिलाफ कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वे केवल गाली-गलौज की राजनीति पर उतर आए हैं। मोदी ने मजाकिया लहजे में कहा, “मुझसे अक्सर लोग मेरी सेहत का राज पूछते हैं, तो मैं उन्हें बताता हूँ कि मैं रोज दो किलो गालियाँ खाता हूँ, यही मेरी ऊर्जा का स्रोत है।” उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस एक विशेष परिवार की मानसिकता से ग्रस्त है, जो प्रधानमंत्री के पद को अपनी जागीर समझती है। उन्हें यह बर्दाश्त नहीं हो रहा कि एक साधारण पृष्ठभूमि का व्यक्ति इस पद पर बैठकर देश की सेवा कैसे कर रहा है।

सिख समाज और दलितों के प्रति दृष्टिकोण

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में सिखों और दलितों के प्रति कांग्रेस के ऐतिहासिक व्यवहार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने रवनीत सिंह बिट्टू जैसे नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने सिखों को हमेशा अपमानित किया है। प्रधानमंत्री ने सदन को याद दिलाया कि किस तरह आंध्र प्रदेश के एक दलित नेता का अपमान किया गया था जब वे सदन की कार्यवाही का हिस्सा थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा सरकार ने हमेशा बाबा साहब अंबेडकर के मूल्यों को प्राथमिकता दी है, जबकि कांग्रेस ने केवल उन्हें चुनावों तक सीमित रखा।

वैश्विक प्रभाव और आर्थिक स्थिरता

राजनीतिक हमलों से इतर, प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक प्रगति और वैश्विक स्तर पर बढ़ती साख पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौतों का हवाला देते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की ओर उम्मीद की नजरों से देख रही है। इन समझौतों से न केवल व्यापार में स्थिरता आएगी, बल्कि भारतीय युवाओं और पेशेवरों के लिए वैश्विक बाजार के दरवाजे भी खुलेंगे। उन्होंने एमएसएमई (MSME) सेक्टर की मजबूती पर जोर देते हुए कहा कि छोटे उद्योग ही आने वाले समय में भारतीय अर्थव्यवस्था की असली ताकत बनेंगे।

आम आदमी पर क्या होगा असर?

प्रधानमंत्री के इस संबोधन और सरकार की नीतियों का सीधा असर आम आदमी की जेब और रोजगार पर पड़ता दिख रहा है। व्यापार समझौतों के माध्यम से विदेशी निवेश भारत आएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर नौकरियों के अवसर पैदा होंगे। साथ ही, संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती और भ्रष्टाचार पर कड़े प्रहार से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुँच रहा है। ‘विकसित भारत’ का रोडमैप यह सुनिश्चित करने के लिए है कि 2047 तक भारत एक आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र बने, जहाँ हर नागरिक को समान अवसर और सम्मान मिले।

आगे की राह और निष्कर्ष

सदन में हुए इस हंगामे और प्रधानमंत्री के जवाब से स्पष्ट है कि आने वाले समय में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच वैचारिक खाई और गहरी हो सकती है। हालांकि, प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन से यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे किसी भी दबाव या आलोचना से विचलित हुए बिना देश के विकास कार्यों को जारी रखेंगे। जनहित के नजरिए से देखा जाए तो लोकतंत्र में सार्थक बहस की आवश्यकता है, न कि व्यक्तिगत आक्षेपों की। देश की जनता विकास और स्थिरता चाहती है, और सरकार का पूरा ध्यान इसी लक्ष्य को प्राप्त करने पर केंद्रित नजर आ रहा है।

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