राजा सिंह ओबेरॉय: रेडियो से टेक्सला टीवी तक का सफर और शिक्षण संस्थानों में योगदान

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देहरादून: जब भारत में टेलीविजन आम घरों तक पहुंचना शुरू हुआ, उस समय राजा सिंह ओबेरॉय ने इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें ‘टीवी मैन ऑफ पंजाब’ के नाम से भी जाना जाता है। ओबेरॉय ने सीमित संसाधनों के साथ कार्य प्रारंभ किया और अपने परिश्रम, दूरदृष्टि तथा उद्यमिता के बल पर इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में अपनी पहचान स्थापित की।

राजा सिंह ओबेरॉय का जन्म 19 फरवरी 1936 को वर्तमान पाकिस्तान के मीरपुर जिले के हिल्लन गांव में हुआ था (जानकारी स्रोतों पर आधारित)। देश के विभाजन उपरांत उनका परिवार भारत आ गया। जीवन के प्रारंभिक चरणों में उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, किंतु इन अनुभवों ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। औपचारिक शिक्षा सीमित होने के बावजूद, उन्होंने स्वयं के प्रयासों से व्यवसाय के क्षेत्र में प्रवेश किया।

वर्ष 1961 में उन्होंने ‘ज्यूपिटर रेडियो’ के माध्यम से अपनी पहली प्रमुख पहल की। उस दौरान ट्रांजिस्टर और रेडियो तेजी से प्रचलन में आ रहे थे, और ज्यूपिटर रेडियो ने किफायती उत्पादों के साथ बाजार में अपनी जगह बनाई। यह उनके लिए एक महत्वपूर्ण शुरुआत थी, जिसने उन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग की एक प्रमुख हस्ती के रूप में स्थापित किया।

इसके उपरांत, 1972 में उन्होंने ‘टेक्सला’ ब्रांड के अंतर्गत टेलीविजन का निर्माण प्रारंभ किया। यह वह दौर था जब भारत में टेलीविजन उद्योग का तेजी से विकास हो रहा था। टेक्सला टीवी किफायती मूल्य और विश्वसनीय गुणवत्ता के कारण काफी प्रचलित हुए। 1980 के दशक में, पंजाब में टेक्सला टीवी की अत्यधिक मांग थी, और यह माना जाता है कि क्षेत्र के टेलीविजन बाजार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इस ब्रांड के नियंत्रण में था। इसी व्यावसायिक सफलता के कारण उन्हें ‘टीवी मैन ऑफ पंजाब’ की उपाधि मिली।

टेलीविजन उद्योग को सुदृढ़ बनाने हेतु, उन्होंने कई सहायक उद्योगों की भी स्थापना की। इनमें राजकमल इंडस्ट्रीज़ (1979) शामिल थी, जिसका कार्य टेलीविजन के लकड़ी के कैबिनेट का निर्माण करना था। इसके अतिरिक्त, मुलार्ड ट्यूब्स लिमिटेड (1986) की स्थापना की गई, जहां टेलीविजन के लिए पिक्चर ट्यूब का उत्पादन किया जाता था। बाद के समय में, उन्होंने बेल्टेक (Beltek) और बेस्टाविजन (Bestavision) जैसे अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांडों को भी बाजार में उतारा।

व्यावसायिक गतिविधियों के अतिरिक्त, राजा सिंह ओबेरॉय समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे। उन्होंने गुरु राम दास एजुकेशनल ट्रस्ट की स्थापना की, जिसके द्वारा अनेक शिक्षण संस्थानों की शुरुआत की गई। इस ट्रस्ट के अधीन जीआरडी एकेडमी (देहरादून), जीआरडी वर्ल्ड स्कूल और जीआरडी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी जैसे संस्थान स्थापित किए गए, जिनका लक्ष्य छात्रों को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ शिक्षा उपलब्ध कराना था। शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान उनके जीवन के उल्लेखनीय योगदानों में से एक माना जाता है।

सामाजिक उत्तरदायित्वों का निर्वहन करते हुए, उन्होंने कई जरूरतमंद व्यक्तियों को रोजगार प्रदान किया और समाज के कमजोर वर्गों की सहायता हेतु विभिन्न पहलें कीं। उनके जीवन की एक प्रमुख विशेषता यह थी कि उन्होंने कठिनाइयों से उभरकर व्यावसायिक सफलता प्राप्त की तथा अपने उद्योगों के माध्यम से हजारों लोगों को रोजगार के अवसर दिए।

28 फरवरी 2026 को 90 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के एक ऐसे युग का समापन हुआ, जिसने देश में टेलीविजन के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

आज राजा सिंह ओबेरॉय को एक ऐसे उद्यमी के रूप में स्मरण किया जाता है, जिन्होंने रेडियो के साथ अपनी यात्रा शुरू की, टेलीविजन उद्योग में अपनी पहचान बनाई और तत्पश्चात शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। उनका जीवन यह दर्शाता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और अथक परिश्रम से सीमित संसाधनों के बावजूद भी कोई व्यक्ति बड़ी सफलता प्राप्त कर सकता है।

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