मधु’ से मिली मिठास — मौन पालन से आत्मनिर्भर बनीं बसंती देवी

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चम्पावत – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ‘आदर्श जनपद चंपावत’ की परिकल्पना अब धरातल पर साकार होती दिख रही है। जिले की ग्रामीण महिलाएं स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। इसी कड़ी में विकासखंड चंपावत के ग्राम पोथ निवासी बसंती देवी का नाम प्रमुखता से उभरकर सामने आया है, जिन्होंने मधुमक्खी पालन (Beekeeping) को अपने जीवन का आधार बनाकर आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM), चंपावत के अंतर्गत “ब्यानधूरा बाबा स्वयं सहायता समूह” से जुड़ने के बाद बसंती देवी ने अपने आत्मविश्वास और समूह के सहयोग से आर्थिक स्वतंत्रता की राह पकड़ी। उन्हें समूह के माध्यम से सीसीएल (Cash Credit Limit) के तहत ₹1 लाख की पूंजी प्राप्त हुई, जिसका उपयोग उन्होंने मधुमक्खी पालन के विस्तार में किया।

“शुरुआत में कुछ ही बॉक्स थे, पर समूह और विभाग के मार्गदर्शन से आज मैं 250 मधुमक्खी बॉक्स का संचालन कर रही हूँ,”
— बसंती देवी, ग्राम पोथ, चंपावत

उनके द्वारा तैयार किया गया शुद्ध और उच्च गुणवत्ता वाला शहद न केवल स्थानीय बाजारों में बल्कि बाहरी शहरों में भी लोकप्रिय हो चुका है। गुणवत्ता और विश्वसनीयता के कारण उन्हें अपने उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त होता है।

आज बसंती देवी मधुमक्खी पालन से ₹15,000 से ₹18,000 प्रति माह की अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि जीवन स्तर में भी स्पष्ट सुधार देखने को मिला है।

ग्रामीण क्षेत्र की इस महिला की सफलता अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। बसंती देवी आज महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की जीवंत मिसाल बन चुकी हैं, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि संकल्प और परिश्रम से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।

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