
चंपावत: शासन ने वर्ग-3 और वर्ग-4 की भूमि के विनियमितीकरण हेतु पूर्व में शासनादेश जारी किए थे। इन आदेशों के माध्यम से वर्ग-4 की भूमि के अवैध कब्जाधारियों और पट्टेदारों को भूमिधरी का अधिकार देते हुए विनियमितीकरण के निर्देश दिए गए थे। इसी क्रम में, वर्ग-3 की भूमि के पट्टेदारों को भी संगणनीय भूमिधरी का अधिकार प्रदान कर विनियमितीकरण की कार्यवाही हेतु निर्देश जारी हुए थे।
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि इन शासनादेशों की निर्धारित अवधि 02 नवंबर, 2021 को समाप्त हुई थी, जिसके फलस्वरूप विनियमितीकरण की अवधि को एक वर्ष के लिए बढ़ाया गया था।
कोविड-19 महामारी के दौरान कुछ ऐसे प्रकरण संज्ञान में आए, जिनमें आवेदकों ने विनियमितीकरण हेतु निर्धारित शुल्क चालान के माध्यम से समय पर जमा कर दिया था। हालांकि, महामारी और प्रतिबंधात्मक परिस्थितियों के कारण विनियमितीकरण की कार्यवाही पूरी नहीं हो सकी थी।
ऐसे मामलों को देखते हुए, शासन ने पुनः अवसर प्रदान कर स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि जिन आवेदकों ने प्रभावी अवधि में शुल्क जमा कराया है, उनके प्रकरणों में नियमानुसार विनियमितीकरण की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। की गई कार्यवाही से शासन को समयबद्ध रूप से अवगत कराया जाए, ताकि शीघ्र निस्तारण हो सके।