भारत-नेपाल सीमा पर लैंड पोर्ट का होगा शिलान्यास, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने आभार जताया

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चंपावत: जनपद के बनबसा (गुदमी) क्षेत्र में भारत-नेपाल सीमा पर एक आधुनिक लैंड पोर्ट विकसित करने के लिए उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के प्रयास सफल हो रहे हैं। लैंड पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (LPAI) द्वारा उत्तराखंड सरकार के सहयोग से इस लैंड पोर्ट का निर्माण किया जा रहा है। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज इस परियोजना के लिए पिछले काफी समय से प्रयासरत रहे हैं। अब शीघ्र ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह संयुक्त रूप से इस लैंड पोर्ट का शिलान्यास करेंगे।

उत्तराखंड के सिंचाई, लोक निर्माण और पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने चंपावत के बनबसा (गुदमी) क्षेत्र में भारत-नेपाल सीमा (महेंद्र नगर) पर आधुनिक लैंड पोर्ट विकसित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और नेपाल के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने इस परियोजना को एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि यह अत्याधुनिक लैंड पोर्ट भारत और नेपाल के बीच संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ मैत्री के एक नए सेतु के रूप में कार्य करेगा। लैंड पोर्ट के निर्माण में आने वाली बाधाओं को तेजी से दूर किया जा रहा है, ताकि परियोजना पर कार्य में गति लाई जा सके।

यह उल्लेखनीय है कि कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने चंपावत के बनबसा क्षेत्र में भारत-नेपाल सीमा (महेंद्र नगर) पर आधुनिक लैंड पोर्ट विकसित करने के लिए कई बार स्थलीय निरीक्षण किए हैं। उन्होंने अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें भी आयोजित कीं और नेपाल के राजदूत से इस परियोजना पर चर्चा की। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, परियोजना के पहले चरण के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत हो चुकी है। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण मंजूरी, 84 एकड़ वन भूमि का हस्तांतरण और अन्य आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा कर लिया गया है।

कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि इस लैंड पोर्ट के बनने से एक ही परिसर में कस्टम, इमिग्रेशन, सुरक्षा सेवाएं, कार्गो टर्मिनल, यात्री टर्मिनल और एक स्वास्थ्य इकाई जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। यह सीमा पर व्यापार और यात्री आवागमन के लिए एक एकीकृत, तीव्र और सुरक्षित प्रणाली विकसित करेगा। इसके निर्माण से किसानों और छोटे उत्पादकों को नेपाली बाजारों तक सीधी पहुंच मिल सकेगी। इससे परिवहन लागत में कमी आएगी और उत्पादों के मूल्य संवर्धन में सहायता मिलेगी। मंत्री के अनुसार, लैंड पोर्ट के परिचालन से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही, इससे भारत-नेपाल के बीच व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलेगा। यह लैंड पोर्ट सीमावर्ती क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बदलने और दोनों देशों के संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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