चम्पावत में 10 संग्रहण केंद्रों को स्थान की स्वीकृति,ग्रामीण आजीविका और स्थानीय उत्पादों के विपणन को मिलेगा बढ़ावा

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चम्पावत: जनपद में ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने, स्थानीय उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देने तथा स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने ग्रामोत्थान परियोजना के तहत 10 स्थानों पर संग्रहण केंद्रों के निर्माण के लिए सरकारी भूमि स्वीकृत की है। यह पहल जनपद में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने और पलायन की चुनौती को कम करने के उद्देश्य से की जा रही है।

जिला प्रशासन के अनुसार, संग्रहण केंद्रों का संचालन स्थानीय स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सौंपा जाएगा। इन केंद्रों के माध्यम से कृषि, बागवानी, दुग्ध, मसाला तथा अन्य स्थानीय उत्पादों का संग्रहण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और विपणन किया जाएगा।

चार संग्रहण केंद्रों का निर्माण पूरा

स्वीकृत भूमि में से चार संग्रहण केंद्रों का निर्माण जनपद के चारों विकासखंड मुख्यालय परिसरों में पूरा किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त लोहाघाट विकासखंड के डैसली और किमतोली तथा चम्पावत विकासखंड के चंदनी, बनबसा, नायकखेड़ा, टनकपुर, अमोड़ी और खलकड़िया में भी संग्रहण केंद्रों के निर्माण के लिए सरकारी भूमि उपलब्ध कराई गई है।

अमोड़ी में वे-साइड एमेनिटीज के लिए भूमि स्वीकृत

जिला प्रशासन ने अमोड़ी में निर्माणाधीन वे-साइड एमेनिटीज परियोजना के लिए भी आवश्यक सरकारी भूमि स्वीकृत की है। प्रशासन के अनुसार, इस सुविधा का उद्देश्य ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देना है। यहां पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाओं के साथ स्थानीय उत्पादों के प्रदर्शन और विक्रय की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।

महिलाओं और युवाओं को मिलेगा लाभ

जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कहा कि संग्रहण केंद्रों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों के लिए संगठित विपणन व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिससे स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

जिला प्रशासन का लक्ष्य ग्रामोत्थान परियोजना के माध्यम से स्थानीय उत्पादों की मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना और उन्हें व्यापक बाजार से जोड़ना है, ताकि स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके तथा जनपद में स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसरों का विस्तार हो सके।