
चंपावत: जनपद के पुनेठी गांव की ज्योति रसयारा ने गांव की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर ‘आंचल’ स्वयं सहायता समूह का गठन किया। समूह में सात महिलाएं शामिल हैं, जिन्होंने पारंपरिक ऐपन कला को स्वरोजगार का माध्यम बनाकर आय अर्जित करने की दिशा में कार्य शुरू किया है।
समूह की महिलाएं ऐपन कला से जुड़े उत्पाद तैयार करती हैं। यह पारंपरिक कला उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान मानी जाती है। समूह की सभी सदस्य नियमित रूप से इस कार्य में भागीदारी करती हैं और उपलब्ध जानकारी के अनुसार समूह को प्रतिमाह लगभग 12 से 15 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है।
सरकारी योजना के तहत मिला मंच
मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना के तहत समूह को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए राज्य स्तरीय मंच उपलब्ध कराया गया। इसके अंतर्गत समूह की महिलाएं विभिन्न स्थानों पर स्टॉल लगाकर अपने ऐपन उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री कर रही हैं। इससे उनके उत्पादों को व्यापक पहचान मिलने के साथ बिक्री में भी वृद्धि दर्ज की गई है।
स्थानीय स्तर पर मिला प्रोत्साहन
प्रेस नोट के अनुसार, जिला प्रशासन की ओर से भी समूह के कार्यों को प्रोत्साहन दिया गया है। जिलाधिकारी मनीष कुमार तथा एपीडी ने समूह की महिलाओं के कार्यों की सराहना करते हुए उनके उत्पादों की खरीद कर स्थानीय कला को बढ़ावा देने का प्रयास किया।
प्रेस नोट के अनुसार, ‘आंचल’ स्वयं सहायता समूह की महिलाएं पारंपरिक कला के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय उत्पादों के प्रचार-प्रसार में भी योगदान दे रही हैं।