
नई दिल्ली-देश के ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा और कामगारों के अधिकारों को लेकर एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला है । केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट’ (वीबी-जी राम जी) को आधिकारिक तौर पर पूरे देश में प्रभाव में ला दिया गया है । इस नए वैधानिक कदम के बाद, ग्रामीण इतिहास में पहली बार एक समान आधार मजदूरी तय कर दी गई है ताकि देश के सबसे निचले स्तर के कामगारों की आर्थिक स्थिति सुधारी जा सके और उन्हें श्रम की गरिमा मिल सके ।
इस नए कानून की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें केवल मजदूरी की दरें ही नहीं बढ़ाई गई हैं, बल्कि श्रमिकों को कई नए कानूनी अधिकार भी सौंपे गए हैं । नई नीति के तहत अब ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष के भीतर मिलने वाले सुनिश्चित रोजगार को 100 दिनों से बढ़ाकर पूरे 125 दिन कर दिया गया है । इसके साथ ही, अलग-अलग राज्यों की पुरानी स्थितियों को ध्यान में रखते हुए दैनिक दिहाड़ी की दरों में 15% से 25% तक का बंपर इजाफा किया गया है । अब पूरे देश में न्यूनतम बेस दर ₹300 प्रतिदिन सुनिश्चित कर दी गई है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर औसत दैनिक आय बढ़कर ₹327.4 पर पहुंच गई है ।
श्रमिकों के शोषण और धांधली को रोकने के लिए इस बार कड़े प्रशासनिक नियम तय किए गए हैं । काम पूरा होने के बाद साप्ताहिक आधार पर या अधिकतम 15 दिनों के भीतर सीधे बैंक खातों में डिजिटल पेमेंट करना अनिवार्य होगा । यदि इस तय समय-सीमा के भीतर मजदूरों को उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं मिलता है, तो संबंधित विभाग को 0.05% प्रतिदिन की दर से मजदूरों को हर्जाना (मुआवजा) देना पड़ेगा । इतना ही नहीं, यदि कोई मजदूर काम के लिए आवेदन करता है और प्रशासन 15 दिनों के भीतर रोजगार देने में असफल रहता है, तो वह श्रमिक कानूनी रूप से बेरोजगारी भत्ता पाने का हकदार होगा । इस पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और मस्टरोल के भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए जियो-टैगिंग, जीपीएस निगरानी और फेस-ऑथेंटिकेशन प्रणाली को अनिवार्य किया गया है ।
क्षेत्रीय असमानता को दूर करने के उद्देश्य से इस नीति के अंतर्गत सबसे ज्यादा लाभ उन राज्यों को दिया गया है जहाँ ऐतिहासिक रूप से मजदूरी काफी कम थी । इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश और हिमाचल प्रदेश जैसे प्रमुख राज्य शामिल हैं, जहाँ मजदूरों को सीधे तौर पर बढ़ा हुआ वेतन मिलेगा ।