
अल्मोड़ा। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) के ऐतिहासिक सफर को यादगार बनाने के लिए राज्य सरकार ‘प्रथम देवभूमि समान नागरिक संहिता दिवस’ मनाने जा रही है। इसी क्रम में जनपद अल्मोड़ा में भी इस भव्य समारोह के आयोजन को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। अपर जिलाधिकारी युक्ता मिश्र की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में तय किया गया कि आगामी 27 जनवरी 2026 को जनपद में विशेष समारोह का आयोजन किया जाएगा。 इस दिवस का मुख्य उद्देश्य समान नागरिक संहिता के प्रति जन-जागरूकता फैलाना और इसके सफल क्रियान्वयन में जुटे तंत्र का उत्साहवर्धन करना है。
उत्कृष्ट सेवा के लिए मिलेगा सम्मान
बैठक में अपर जिलाधिकारी युक्ता मिश्र ने जानकारी दी कि 27 जनवरी को आयोजित होने वाले मुख्य समारोह में उन अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने समान नागरिक संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में उत्कृष्ट एवं सराहनीय कार्य किया है。 यह सम्मान न केवल सरकारी तंत्र को बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा, बल्कि इस कानून की जमीनी सफलता को भी रेखांकित करेगा।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों से मिलेगी UCC की जानकारी
समारोह को केवल औपचारिक न रखते हुए इसे जन-संवाद का माध्यम भी बनाया जाएगा। बैठक में तय किया गया कि कार्यक्रम के दौरान भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा。 इन कार्यक्रमों की थीम न केवल उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर आधारित होगी, बल्कि इनके माध्यम से समान नागरिक संहिता (UCC) के विभिन्न पहलुओं और इसके लाभों के बारे में आम नागरिकों को जागरूक भी किया जाएगा。
प्रशासनिक समन्वय और समयबद्ध तैयारी के निर्देश
अपर जिलाधिकारी युक्ता मिश्र ने कलेक्ट्रेट में मौजूद सभी विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि इस आयोजन को अत्यंत गरिमामय और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया जाए。 उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें ताकि कार्यक्रम की सभी तैयारियाँ निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी हो सकें。 उन्होंने आयोजन स्थल की व्यवस्था, अतिथियों के बैठने और सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर भी आवश्यक सुझाव दिए।
बैठक में उपस्थित रहे प्रमुख अधिकारी
कलेक्ट्रेट में आयोजित इस रणनीतिक बैठक में जिला पंचायत राज अधिकारी राजेंद्र सिंह, जिला आपूर्ति अधिकारी मुकेश कुमार और विद्या कर्नाटक सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे。 सभी ने कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए अपने-अपने सुझाव साझा किए और दी गई जिम्मेदारियों को समय पर पूर्ण करने का आश्वासन दिया।
आगे क्या बदलेगा?
27 जनवरी को होने वाले इस राज्यव्यापी आयोजन के बाद उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता के प्रति आम जनता की समझ और स्पष्ट होगी। यह दिवस हर वर्ष मनाए जाने की परंपरा की शुरुआत है, जिससे भविष्य में इस कानून के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और तेजी आने की उम्मीद है।
आम आदमी को क्या फायदा
समान नागरिक संहिता दिवस के माध्यम से होने वाले जागरूकता कार्यक्रमों से आम आदमी को अपने अधिकारों और कानून की बारीकियों को समझने में आसानी होगी। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए जटिल कानूनी विषयों को सरल भाषा में जनता तक पहुंचाया जाएगा, जिससे भ्रामक जानकारियों पर लगाम लगेगी।
निष्कर्ष (जनहित के नजरिए से)
‘समान नागरिक संहिता दिवस’ का आयोजन यह दर्शाता है कि राज्य सरकार इस कानून को केवल कागजों तक सीमित न रखकर जन-जन के बीच ले जाना चाहती है। सम्मान समारोह के जरिए प्रशासनिक दक्षता में सुधार होगा, वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सामाजिक जुड़ाव बढ़ेगा। यह आयोजन उत्तराखंड के लिए एक नए सामाजिक युग की शुरुआत का प्रतीक है।