हल्द्वानी: नामी ज्वेलरी शोरूम के जीएम पर 90 लाख के गबन का आरोप, प्रेम संबंधों के चलते लुटाया कंपनी का सोना

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हल्द्वानी। उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित एक प्रतिष्ठित ज्वेलरी शोरूम में विश्वासघात और गबन का एक बड़ा मामला सामने आया है। शोरूम के जनरल मैनेजर (जीएम) पर करीब 90 लाख रुपये के सोने और हीरे के आभूषणों की हेराफेरी का आरोप लगा है। पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी कर्मचारी शोरूम के कीमती स्टॉक को अपनी प्रेमिका को महंगे उपहार देने के लिए इस्तेमाल कर रहा था। फिलहाल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

कैसे खुला गबन का यह बड़ा मामला?

यह पूरा घटनाक्रम हल्द्वानी के एक जाने-माने ज्वेलरी स्टोर का है। इस शोरूम के प्रबंध निदेशक (एमडी) नागेंद्र चंद्र भट्ट हैं, जो स्वयं पुलिस विभाग में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। मामले का खुलासा तब हुआ जब कंपनी ने 24 फरवरी से 28 फरवरी 2026 के बीच अपने स्टॉक का वार्षिक ऑडिट कराया। ऑडिट के दौरान स्टॉक में भारी अंतर पाया गया। जब बारीकी से मिलान किया गया, तो पता चला कि शोरूम से करीब 90 लाख रुपये मूल्य के सोने और हीरे के गहने गायब हैं।

स्टॉक की जिम्मेदारी तरुण जैन नामक व्यक्ति के पास थी, जो शोरूम में जीएम के पद पर कार्यरत था। तरुण के पास ही कीमती आभूषणों के रखरखाव, प्रबंधन और निगरानी का पूरा प्रभार था। स्टॉक में इतनी बड़ी कमी मिलने के बाद जब उससे पूछताछ की कोशिश की गई, तो मामला संदिग्ध नजर आने लगा।

प्रेमिका को खुश करने के लिए ‘लुटाया’ शोरूम का स्टॉक

पुलिस की प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं हैं। एसपी सिटी मनोज कत्याल के अनुसार, आरोपी जीएम तरुण जैन का एक महिला के साथ प्रेम संबंध था। बताया जा रहा है कि पिछले करीब डेढ़ साल से वह अपनी प्रेमिका को खुश करने के लिए शोरूम के स्टॉक से महंगे गोल्ड और डायमंड गिफ्ट दे रहा था। वह धीरे-धीरे स्टॉक से गहने निकालता रहा, ताकि किसी को तुरंत भनक न लगे। हालांकि, ऑडिट की प्रक्रिया ने उसकी इस चालाकी की पोल खोल दी।

शातिर तरीके से हुआ फरार

घटनाक्रम के मुताबिक, तरुण जैन 4 मार्च तक अवकाश पर था। 5 मार्च को वह शोरूम पहुंचा, लेकिन जैसे ही उसे ऑडिट की गड़बड़ी और पकड़े जाने का डर सताया, उसने भागने की योजना बना ली। दोपहर के समय उसने शोरूम में मौजूद अन्य कर्मचारियों से कहा कि वह किसी ग्राहक से मिलने जा रहा है। इसके बाद वह शोरूम से निकला और वापस नहीं लौटा। वर्तमान में उसके दोनों मोबाइल नंबर बंद आ रहे हैं और वह पुलिस की पहुंच से बाहर है।

पुलिस पृष्ठभूमि के एमडी ने दर्ज कराया मुकदमा

इस मामले में शिकायतकर्ता नागेंद्र चंद्र भट्ट का भी दिलचस्प बैकग्राउंड है। वह पूर्व में पुलिस विभाग में सिपाही के तौर पर काम कर चुके हैं। लगभग 20 साल तक पुलिस सेवा और सीबीसीआईडी में रहने के बाद उन्होंने वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) ली और अपना ज्वेलरी बिजनेस शुरू किया। हल्द्वानी के अलावा रुद्रपुर और अन्य शहरों में भी उनके शोरूम हैं। अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी और एसएसपी नैनीताल को शिकायती पत्र सौंपा।

कोतवाल विजय मेहता ने बताया कि एमडी की तहरीर पर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस की टीमें आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।

उपभोक्ताओं और आम आदमी पर प्रभाव

इस तरह की घटनाएं किसी भी प्रतिष्ठित संस्थान के भरोसे को चोट पहुँचाती हैं। हालांकि, यह गबन कंपनी के आंतरिक प्रबंधन का मामला है, लेकिन इसका असर अप्रत्यक्ष रूप से बाजार की साख पर पड़ता है। ग्राहकों के लिए यह एक सबक है कि वे हमेशा पक्के बिल और हॉलमार्क वाली ज्वेलरी ही लें, ताकि संस्थान के आंतरिक विवादों या हेराफेरी का असर उनके निवेश पर न पड़े। ज्वेलरी सेक्टर में काम करने वाले अन्य छोटे-बड़े व्यापारियों के लिए भी यह एक चेतावनी है कि वे अपने कीमती स्टॉक की निगरानी के लिए केवल सीसीटीवी पर निर्भर न रहें, बल्कि समय-समय पर फिजिकल ऑडिट भी अनिवार्य रूप से करें।

निष्कर्ष: पारदर्शिता और सतर्कता ही समाधान

यह मामला दर्शाता है कि डिजिटल युग और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के बावजूद, मैन्युअल ऑडिट और आंतरिक नियंत्रण कितने महत्वपूर्ण हैं। एक कर्मचारी का व्यक्तिगत लालच न केवल उसकी नौकरी और साख खत्म कर देता है, बल्कि पूरे संस्थान को आर्थिक क्षति पहुंचाता है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और गबन किए गए जेवरात बरामद कर लिए जाएंगे। जनता के नजरिए से देखें तो यह मामला व्यक्तिगत ईमानदारी और पेशेवर नैतिकता के पतन का एक उदाहरण है।

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