
चंपावत: वनाग्नि की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने और त्वरित सूचना तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से जनपद में एक विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। यह अभियान शासन के निर्देशों के अनुरूप चलाया जा रहा है।
अपर जिलाधिकारी कृष्णा नाथ गोस्वामी ने इस संबंध में जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि वनाग्नि से संबंधित सूचनाओं के तीव्र आदान-प्रदान के लिए भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) के ‘फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम’ के साथ अधिक से अधिक व्यक्तियों को जोड़ना आवश्यक है। इस प्रणाली के माध्यम से संबंधित क्षेत्र में आग लगने की घटना की जानकारी होते ही पंजीकृत व्यक्ति के मोबाइल पर तत्काल अलर्ट प्राप्त होगा, जिससे समय रहते उचित एवं प्रभावी कार्यवाही संभव हो सकेगी।
अपर जिलाधिकारी ने आगे बताया कि जनपद के सभी सरकारी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के अतिरिक्त विभिन्न संस्थाओं, ग्राम प्रधानों, सरपंचों, वन पंचायत सदस्यों तथा सामान्य नागरिकों का भी ‘सब्सक्राइबर रजिस्ट्रेशन’ सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके लिए भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) के पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया को एक ‘फ्लो चार्ट’ के जरिए सरल बनाया गया है। इस व्यवस्था का प्राथमिक उद्देश्य सूचना तंत्र को अत्यधिक सुदृढ़ बनाना है, ताकि वनाग्नि की किसी भी घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय स्तर पर तैनात जिम्मेदार पदाधिकारी और ग्रामीण त्वरित रूप से सक्रिय हो सकें।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि जनपद में आयोजित होने वाले सभी बहुउद्देशीय शिविरों, विभागीय बैठकों और कार्यशालाओं में इस अलर्ट सिस्टम का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी ग्रामों में नागरिकों को इस पोर्टल पर पंजीकरण करने के लिए प्रोत्साहित करें। अपर जिलाधिकारी ने इस बात पर बल दिया कि वनाग्नि केवल प्राकृतिक संपदा को ही क्षति नहीं पहुँचाती, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी एक गंभीर संकट उत्पन्न करती है। ऐसी स्थिति में, आधुनिक तकनीक का सदुपयोग करते हुए और जनभागीदारी सुनिश्चित करके ही जंगलों को सुरक्षित रखा जा सकता है।