
चम्पावत: भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन संचालित किया जा रहा है। इसी मिशन के अंतर्गत चम्पावत जनपद में किसानों के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) बनाने का कार्य शुरू हो गया है।
इस मिशन का एक महत्वपूर्ण घटक एग्रीस्टैक (AgriStack) है। एग्रीस्टैक के जरिए प्रत्येक किसान को उनकी आधार संख्या के आधार पर एक विशिष्ट डिजिटल पहचान पत्र, जिसे यूनिक फार्मर आईडी कहा जाएगा, जारी किया जाएगा।
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि इस डिजिटल पहचान पत्र में किसान का व्यक्तिगत विवरण, उनके स्वामित्व वाली भूमि का विस्तृत ब्यौरा, बोई गई फसल की जानकारी और अन्य सभी कृषि संबंधी अभिलेख एक साथ एकीकृत रूप से दर्ज किए जाएंगे।
यह नई व्यवस्था केंद्र सरकार और राज्य सरकार की विभिन्न कृषि संबंधी योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक सीधे, पूर्णतः पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पहुंचाने में अत्यधिक सहायक होगी।
फार्मर रजिस्ट्री का मुख्य उद्देश्य किसानों के समस्त कृषि डेटा को डिजिटल प्रारूप में सुरक्षित और सुव्यवस्थित करना है। इस महत्वपूर्ण उद्देश्य की पूर्ति के लिए एक विशेष ऑनलाइन वेब पोर्टल ukfr.agristack.gov.in और एक मोबाइल एप्लीकेशन विकसित किया गया है।
यह डिजिटल व्यवस्था विशेष रूप से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना सहित अन्य कृषि सब्सिडी, कृषि ऋण और फसल बीमा जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ सीधे और कुशलता से किसानों तक पहुंचाने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी।
पंजीकरण की संपूर्ण प्रक्रिया आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से ही संपन्न होगी, जिसमें फिंगरप्रिंट स्कैन, फेस ऑथेंटिकेशन अथवा ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) का उपयोग किया जा सकेगा। राज्य स्तर पर इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी और मुख्य कृषि अधिकारी की यूजर आईडी पहले ही सृजित की जा चुकी हैं।
मुख्य कृषि अधिकारी अपने अधीन कार्यरत ऑपरेटरों के लिए आवश्यक यूजर आईडी बनाएंगे। वहीं, तहसील स्तर पर राजस्व उपनिरीक्षक और लेखपाल द्वारा दस्तावेजों के सत्यापन का कार्य पूर्ण किया जाएगा। लेखपाल द्वारा सत्यापित किए गए सभी अभिलेखों को संबंधित तहसीलदार अथवा नायब तहसीलदार द्वारा अंतिम रूप से अनुमोदित किया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण डिजिटल पहल के माध्यम से पात्र किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की आर्थिक सहायता बिना किसी बाधा के निर्बाध रूप से प्राप्त होगी। इसके अतिरिक्त, विभिन्न कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। सटीक और विश्वसनीय कृषि आंकड़ों के आधार पर अधिक प्रभावी कृषि नीतियों का निर्धारण संभव हो सकेगा। यह कदम किसानों में तकनीकी जागरूकता को बढ़ावा देने और उन्हें डिजिटल रूप से अधिक सशक्त बनाने में भी सहायक सिद्ध होगा।
पंजीकरण कराते समय किसानों को अपना आधार कार्ड, आधार से लिंक किया हुआ सक्रिय मोबाइल नंबर और भूमि संबंधी आवश्यक अभिलेख, जैसे खसरा, खतौनी या जमाबंदी, अपने साथ रखना अनिवार्य होगा।
जिला प्रशासन ने जनपद के सभी किसानों से अनुरोध किया है कि वे इस डिजिटल अभियान में सक्रिय रूप से शामिल होकर अपनी यूनिक फार्मर आईडी जल्द से जल्द बनवाएं। ऐसा करने से भविष्य में संचालित होने वाली सभी सरकारी योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों का लाभ उन्हें बिना किसी रुकावट या बाधा के प्राप्त हो सकेगा।