
चंपावत: चंपावत सरस कॉर्बेट महोत्सव 2026 के पांचवें दिन टनकपुर में एक सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। यह संध्या लोक परंपराओं, आस्था, भक्ति और आधुनिक कुमाऊँनी लोक-संगीत के एक अद्भुत संगम का केंद्र बनी। हजारों की संख्या में उपस्थित दर्शकों ने इस कार्यक्रम में अपनी भागीदारी दर्ज कराई।
इस सांस्कृतिक संध्या ने उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को मंच पर जीवंत रूप प्रदान किया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकार, लोकवाद्यों से निकलने वाली मधुर ध्वनियाँ, सजीव अभिनय और ऊर्जा से परिपूर्ण प्रस्तुतियाँ पूरे वातावरण को उत्सवमय बना रही थीं।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण यूनेस्को द्वारा अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता प्राप्त उत्तराखंड की लोक परंपरा रम्माण की प्रस्तुति थी। गोपीनाथ संगीतशाला समिति, गोपेश्वर द्वारा इसे प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति में पारंपरिक मुखौटे, विशिष्ट वेशभूषा और लोकनृत्य की अनूठी शैली के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक आत्मा का प्रदर्शन किया गया। कलाकारों की अनुशासित और प्रभावशाली प्रस्तुति को दर्शकों ने खड़े होकर तालियों के साथ सराहा।
सांस्कृतिक संध्या के दौरान भक्ति और आदर्शों से परिपूर्ण रामकथा का भी मंचन किया गया। त्रि देवाशीष नृत्य एवं नाट्य अकादमी, लखनऊ ने तनुजा ओली के निर्देशन में रामायण पर आधारित एक भव्य नाट्य प्रस्तुति दी।
इस कार्यक्रम में लोकगायक विजय मेहता ने अपनी सुमधुर आवाज से एक आत्मीय माहौल बनाया। लोकगायक ललित गीत्यार ने “शौक्याणी” और “मेरी ओ पहाड़न” जैसे गीतों को प्रस्तुत किया, जिन्होंने उपस्थित युवाओं को आकर्षित किया।
गायक स्वाति भट्ट ने “स्वाणी मुखड़ी” गीत की मधुर प्रस्तुति दी, जिससे श्रोतागण मंत्रमुग्ध हुए। हरु जोशी ने “खिमली इजा” और “पहाड़ो ठंडो पाणी” जैसे गीतों के माध्यम से पहाड़ की संस्कृति और उसकी संवेदनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
संध्या का केंद्रीय आकर्षण लोकगायक ललित मोहन जोशी की सशक्त प्रस्तुति रही। उन्होंने “राइफल मेरी कानी मा”, “रुकमा रुक्मणी”, “ना जाए भावना”, “ओ रे मोहना” और “घिस ले जरा पोडर” जैसे कई प्रसिद्ध गीतों की श्रृंखला प्रस्तुत की। इन प्रस्तुतियों से पूरा मैदान उत्साह और ऊर्जा से भर गया। उनके मंच पर आते ही दर्शकों में उल्लेखनीय प्रतिक्रिया देखने को मिली और कार्यक्रम स्थल तालियों व जयकारों से गूंज उठा।
कार्यक्रम के दौरान कलाकार लछु ने भी अपनी प्रस्तुति दी, जिससे दर्शक संगीत पर थिरकने लगे। उनकी प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक संध्या को गति प्रदान की, और देर रात तक दर्शक संगीत के कार्यक्रमों का आनंद लेते रहे।