
चम्पावत – जनपद चम्पावत में नशीली एवं मनःप्रभावी दवाओं की अवैध बिक्री पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी मनीष कुमार के निर्देश पर औषधि विभाग की टीम ने विशेष प्रवर्तन अभियान चलाते हुए जिले के विभिन्न मेडिकल स्टोरों पर औचक निरीक्षण किया। अभियान का मुख्य उद्देश्य कोडीन युक्त कफ सिरप और अन्य मनःप्रभावी दवाओं के दुरुपयोग को रोकना तथा युवाओं को नशे की प्रवृत्ति से सुरक्षित रखना है।
औषधि निरीक्षक हर्षिता के नेतृत्व में गठित टीम ने जनपद के कुल 7 थोक और खुदरा औषधि प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दवाओं के स्टॉक, बिक्री रजिस्टर, क्रय-विक्रय अभिलेख और लाइसेंस से संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच की गई। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि प्रतिबंधित अथवा नियंत्रित श्रेणी की दवाओं की बिक्री नियमानुसार की जा रही है या नहीं।
कार्रवाई के दौरान टीम को कुछ दवाएं संदिग्ध प्रतीत हुईं, जिनके 7 नमूने संग्रहित कर परीक्षण एवं विश्लेषण के लिए राजकीय औषधि विश्लेषणशाला भेज दिए गए हैं। अब इन नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि दवाओं में अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान मेडिकल स्टोरों में स्थापित CCTV कैमरों की कार्यशीलता और रिकॉर्डिंग व्यवस्था की भी जांच की गई। अधिकारियों ने यह देखा कि कैमरे चालू अवस्था में हैं या नहीं तथा उनकी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जा रही है या नहीं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि दवाओं की बिक्री केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट की उपस्थिति में ही की जाए, जैसा कि नियमों में निर्धारित है।
औषधि निरीक्षक हर्षिता ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे के किसी भी मनःप्रभावी या एंटीबायोटिक दवा की बिक्री नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक दवा की बिक्री पर कैश मेमो या बिल जारी करना अनिवार्य है, ताकि दवाओं की ट्रैकिंग सुनिश्चित की जा सके और किसी भी प्रकार की अनियमितता की स्थिति में रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।
प्रशासन ने मेडिकल स्टोर संचालकों को चेतावनी दी है कि लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन, बिना पर्चे दवा बिक्री, रिकॉर्ड संधारण में लापरवाही या प्रतिबंधित दवाओं का अवैध भंडारण पाए जाने पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर लाइसेंस निलंबन या निरस्तीकरण जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
हाल के वर्षों में कोडीन युक्त कफ सिरप और अन्य मनःप्रभावी दवाओं के दुरुपयोग के मामले सामने आने के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी दवाओं का अनियंत्रित उपयोग युवाओं में नशे की लत को बढ़ावा दे सकता है, जिससे सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए जिले में विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं बल्कि एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। भविष्य में भी इसी प्रकार की सघन चेकिंग और औचक निरीक्षण जारी रहेंगे। प्रशासन का कहना है कि दवा व्यवसाय से जुड़े सभी लोग नियमों का पालन करें और समाज में स्वास्थ्य सुरक्षा की जिम्मेदारी को समझें।
जनपद प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी प्रकार की नशीली या मनःप्रभावी दवा का उपयोग न करें। यदि किसी स्थान पर अवैध दवा बिक्री की सूचना मिलती है, तो संबंधित विभाग को सूचित करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
इस अभियान के माध्यम से प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि चम्पावत में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। युवाओं के भविष्य की सुरक्षा और समाज को नशामुक्त बनाने की दिशा में यह कार्रवाई एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।